हर महीने वही पल आता है। घर के मंदिर के सामने पैर ठिठक जाते हैं। हाथ दीये की ओर बढ़ता है और फिर रुक जाता है। मन में एक ही सवाल – “इन दिनों पूजा करूँ या नहीं? कहीं कुछ गलत तो नहीं हो जाएगा?” करोड़ों स्त्रियाँ यह सवाल चुपचाप अपने भीतर लिए घूमती हैं,…
सूरज उगने से पहले जब आकाश में नारंगी रंग फैलने लगता है – और फिर दोपहर जब सूरज ठीक शीर्ष पर होता है – और शाम जब रोशनी धीरे-धीरे विदा लेती है: ये तीनों क्षण हिंदू परंपरा में “संधि समय” कहलाते हैं। दिन और रात का संधि-स्थल। और गायत्री मंत्र इन्हीं तीनों संधियों का मंत्र…
नाम जप शुरू करने वाले ज़्यादातर लोग एक ही गलती करते हैं: शिव जप के लिए तुलसी माला उठा लेते हैं। आखिर तुलसी तो पवित्र है – तो क्या गलत? गलत यह है कि तुलसी विष्णु और उनके परिवार की है: कृष्ण, राम, हनुमान। शिव का मन दूसरी माला में बसता है। अगर आप ॐ…
ब्रह्मा के पास जब नारद एक प्रश्न लेकर आए – “इस कलियुग में कौन सा एक उपाय है जिससे मनुष्य संसार के बंधन से मुक्त हो सके?” – तो ब्रह्मा ने जवाब में एक मंत्र दिया। सोलह शब्दों का। बिना किसी नियम के। बिना किसी पात्रता-शर्त के। यह संवाद कलि-संतरण उपनिषद में है – वैष्णव…
एक सवाल सोचिए: भगवान राम ने अपने पूरे जीवनकाल में कितने लोगों को सीधे तारा? ऋषि-पत्नी अहिल्या का उद्धार – यही सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है। लेकिन तुलसीदास रामचरितमानस में एक चौंकाने वाली तुलना करते हैं। राम एक तापस तिय तारी। नाम कोटि खल कुमति सुधारी॥ अर्थ: राम ने एक तपस्विनी (अहिल्या) का उद्धार किया –…
जप शुरू किया, माला उठाई, पहले तीन मनके घुमाए – और मन पहुँच गया कल की उस मीटिंग पर जो अधूरी रह गई थी। यह आपके साथ ही नहीं होता। अर्जुन ने भगवान कृष्ण से ठीक यही बात कही थी: मन बड़ा चंचल है, प्रमाथन करने वाला, बलवान और दृढ़ (भगवद गीता 6.34)। कृष्ण ने…
आज तक आपने नाम जपा है – पर कभी लिखा है? तुलसीदास के काल से चली आ रही एक परंपरा है जिसमें भक्त अपने जीवनकाल में लाखों, यहाँ तक कि करोड़ों बार “राम” लिखते हैं। इन नोटबुक्स को “राम नाम बही” कहते हैं, और वृंदावन में ऐसी हजारों बहियों का संग्रह आज भी सुरक्षित है।…
कभी आधी रात नींद टूटे और होंठों पर नाम हो – जपने की कोशिश नहीं की थी, फिर भी नाम था। या दिनभर काम करते हुए मन के किसी कोने में राम, राम, राम चलता रहे। यह अनुभव जिन्हें हुआ है, वे जानते हैं कि यह सामान्य जप से बिल्कुल अलग है। इसे संत परंपरा…
“नाम जप के नियम” खोजते हुए आपने अब तक बहुत कुछ पढ़ा होगा – कोई कहता है पहले नहाओ, कोई कहता है माला चाहिए, कोई कहता है संध्याकाल ही सही है, कोई कहता है प्याज मत खाओ। इतनी शर्तें सुनकर लगता है – नाम जप एक जटिल अनुष्ठान है जिसे “सही तरीके से” करना मुश्किल…
आपकी थाली में प्याज-लहसुन है और मन में भगवान का नाम – क्या दोनों एक साथ नहीं हो सकते? यह सवाल उन करोड़ों भक्तों के मन में उठता है जो अपने रोज़ के खाने में प्याज-लहसुन का इस्तेमाल करते हैं लेकिन जप करना भी चाहते हैं। इसका जवाब उतना कठोर नहीं है जितना अक्सर बताया…