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  • हरे कृष्ण महामंत्र का जप करते कृष्णभक्त
    मंत्र और प्रेरणा

    हरे कृष्ण महामंत्र: 16 शब्द जो कलियुग मिटा दें

    ByAbhishek K जून 8, 2026जून 15, 2026

    ब्रह्मा के पास जब नारद एक प्रश्न लेकर आए – “इस कलियुग में कौन सा एक उपाय है जिससे मनुष्य संसार के बंधन से मुक्त हो सके?” – तो ब्रह्मा ने जवाब में एक मंत्र दिया। सोलह शब्दों का। बिना किसी नियम के। बिना किसी पात्रता-शर्त के। यह संवाद कलि-संतरण उपनिषद में है – वैष्णव…

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  • श्री राम के नाम का जप करते श्रद्धालु
    मंत्र और प्रेरणा

    राम नाम: जिसने भगवान राम से भी ज्यादा लोगों को तारा

    ByAbhishek K जून 8, 2026जून 15, 2026

    एक सवाल सोचिए: भगवान राम ने अपने पूरे जीवनकाल में कितने लोगों को सीधे तारा? ऋषि-पत्नी अहिल्या का उद्धार – यही सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है। लेकिन तुलसीदास रामचरितमानस में एक चौंकाने वाली तुलना करते हैं। राम एक तापस तिय तारी। नाम कोटि खल कुमति सुधारी॥ अर्थ: राम ने एक तपस्विनी (अहिल्या) का उद्धार किया –…

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  • जप में मन की एकाग्रता पाने का प्रयास करता साधक
    मंत्र और प्रेरणा

    जप में मन भटके तो क्या करें? संतों का सिद्ध उपाय

    ByAbhishek K जून 8, 2026जून 15, 2026

    जप शुरू किया, माला उठाई, पहले तीन मनके घुमाए – और मन पहुँच गया कल की उस मीटिंग पर जो अधूरी रह गई थी। यह आपके साथ ही नहीं होता। अर्जुन ने भगवान कृष्ण से ठीक यही बात कही थी: मन बड़ा चंचल है, प्रमाथन करने वाला, बलवान और दृढ़ (भगवद गीता 6.34)। कृष्ण ने…

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  • कॉपी में राम नाम लिखकर लिखित जप करते हुए
    मंत्र और प्रेरणा

    लिखित जप: कलियुग का सबसे सरल साधन

    ByAbhishek K जून 6, 2026जून 15, 2026

    आज तक आपने नाम जपा है – पर कभी लिखा है? तुलसीदास के काल से चली आ रही एक परंपरा है जिसमें भक्त अपने जीवनकाल में लाखों, यहाँ तक कि करोड़ों बार “राम” लिखते हैं। इन नोटबुक्स को “राम नाम बही” कहते हैं, और वृंदावन में ऐसी हजारों बहियों का संग्रह आज भी सुरक्षित है।…

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  • अजपा जप में स्वतः चलता नाम स्मरण
    मंत्र और प्रेरणा

    अजपा जप: जब नाम अपने आप चलने लगे

    ByAbhishek K जून 6, 2026जून 15, 2026

    कभी आधी रात नींद टूटे और होंठों पर नाम हो – जपने की कोशिश नहीं की थी, फिर भी नाम था। या दिनभर काम करते हुए मन के किसी कोने में राम, राम, राम चलता रहे। यह अनुभव जिन्हें हुआ है, वे जानते हैं कि यह सामान्य जप से बिल्कुल अलग है। इसे संत परंपरा…

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  • नाम जप के नियमों का पालन करते हुए भक्त
    मंत्र और प्रेरणा

    नाम जप के नियम: क्या करें और क्या न करें – पूरी सच्चाई एक जगह

    ByAbhishek K जून 5, 2026जून 16, 2026

    “नाम जप के नियम” खोजते हुए आपने अब तक बहुत कुछ पढ़ा होगा – कोई कहता है पहले नहाओ, कोई कहता है माला चाहिए, कोई कहता है संध्याकाल ही सही है, कोई कहता है प्याज मत खाओ। इतनी शर्तें सुनकर लगता है – नाम जप एक जटिल अनुष्ठान है जिसे “सही तरीके से” करना मुश्किल…

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  • सात्विक आहार और नाम जप के नियम
    मंत्र और प्रेरणा

    प्याज-लहसुन खाकर नाम जप करना ठीक है? सच्चाई जो आपको पता होनी चाहिए

    ByAbhishek K जून 5, 2026जून 15, 2026

    आपकी थाली में प्याज-लहसुन है और मन में भगवान का नाम – क्या दोनों एक साथ नहीं हो सकते? यह सवाल उन करोड़ों भक्तों के मन में उठता है जो अपने रोज़ के खाने में प्याज-लहसुन का इस्तेमाल करते हैं लेकिन जप करना भी चाहते हैं। इसका जवाब उतना कठोर नहीं है जितना अक्सर बताया…

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  • गायत्री मंत्र का जप करती महिला
    मंत्र और प्रेरणा

    क्या महिलाएं गायत्री मंत्र जप कर सकती हैं? दोनों पक्षों की सच्चाई

    ByAbhishek K जून 5, 2026जून 15, 2026

    यह प्रश्न पिछले कई दशकों में लाखों घरों में उठा है। एक तरफ शास्त्र की परंपरा है, दूसरी तरफ भक्ति की उदार धारा। दोनों को ध्यान से सुनना ज़रूरी है – क्योंकि दोनों में सच्चाई का एक-एक हिस्सा है। शास्त्रीय दृष्टिकोण: परंपरागत मत क्या कहता है कुछ शास्त्रीय ग्रंथों और परंपराओं में गायत्री उपासना को…

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  • रोज़मर्रा के जीवन में मन ही मन नाम स्मरण
    मंत्र और प्रेरणा

    क्या मन ही मन हर जगह भगवान का नाम ले सकते हैं? संतों का जवाब

    ByAbhishek K जून 5, 2026जून 15, 2026

    संत कबीर ने गलियों में कपड़ा बुना और नाम जपते रहे। संत तुकाराम खेत में काम करते हुए विट्ठल-नाम में डूबे रहते थे। संत नरसी मेहता बाज़ार में, चौपाल में, हर जगह नाम लेते थे – और उन्होंने कभी नहीं पूछा: “क्या यहाँ नाम लेना ठीक है?” यह प्रश्न उनके मन में आया ही नहीं।…

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  • भोजन के बाद नाम जप के नियम
    मंत्र और प्रेरणा

    खाना खाकर या जूठे मुँह नाम जप कर सकते हैं? असली नियम क्या है

    ByAbhishek K जून 5, 2026जून 15, 2026

    खाना खाने के बाद लाखों भक्त सोचते हैं – “मुँह जूठा है, अभी भगवान का नाम नहीं लेना चाहिए।” यह सोच स्वाभाविक लगती है, लेकिन इसमें एक महत्वपूर्ण गलतफहमी छिपी है। परंपरागत शुचिता का यह नियम नाम के लिए नहीं है – यह माला और औपचारिक पूजा-क्रिया के लिए है। यह एक फर्क समझ लेने…

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