वृंदावन की गलियों में एक पल के लिए खड़े हो जाइए। सुबह के वक्त जब मंदिर की घंटियाँ बजती हैं और भक्तों के मुँह से एक ही पुकार निकलती है – “बांके बिहारी लाल की जय!” – तो उस क्षण में कुछ ऐसा होता है जो शब्दों में कहना मुश्किल है। जो वृंदावन कभी नहीं…
महीने की बीस तारीख़। तनख्वाह आने में दस दिन बाकी हैं और जेब पहले ही खाली है। EMI का मैसेज आ चुका है, बच्चे की फीस सामने खड़ी है, और रात को नींद की जगह हिसाब चलता है – किससे लें, किसे दें, कैसे चलेगा। पैसों की तंगी सिर्फ जेब पर नहीं पड़ती, वह मन…
भगीरथ ने हज़ारों वर्ष तपस्या की – इसलिए नहीं कि वे खुद कुछ पाना चाहते थे, बल्कि इसलिए कि उनके पूर्वज श्राद्ध-तर्पण के बिना मुक्ति नहीं पा सकते थे। उनकी तपस्या के अंत में गंगा उतरने को तैयार थी – पर पृथ्वी उसका वेग सहने में असमर्थ थी। तब भगीरथ ने शिव से प्रार्थना की:…
मृत्यु से कौन नहीं डरता? यह भय मनुष्य मात्र के मन में है। पर जो उज्जैन जाते हैं और महाकाल मंदिर में खड़े होते हैं, वे कुछ अलग महसूस करते हैं – एक अजीब शांति, जैसे भय का सामना करने पर भय कम हो जाता है। इस अनुभव का राज उस नाम में है जो…
भारत में एक परंपरा है – जब दो शिव-भक्त मिलते हैं, तो “जय भोलेनाथ!” की जयघोष से एक-दूसरे का स्वागत करते हैं। यह केवल अभिवादन नहीं है। जब आप “भोलेनाथ” कहते हैं, उसी क्षण आपके मुख से शिव का एक विशेष नाम निकलता है – और परंपरा में हर ऐसा उच्चारण एक छोटा नाम-जप होता…
एक सवाल जो बहुत से हिंदू भक्तों के मन में आता है – जब वे गुरुद्वारे जाते हैं या सिख मित्रों के साथ “वाहेगुरु” सुनते हैं: “क्या यह हमारे नाम जप जैसा ही है?” जवाब हाँ है – और इससे भी गहरा कुछ है। गुरु नानक देव जी ने जो “नाम सिमरन” की शिक्षा दी,…
शिरडी में एक बार एक भक्त ने साईं बाबा से पूछा: “बाबा, हमें क्या करना चाहिए?” साईं बाबा ने दो शब्द दिए – “श्रद्धा और सबूरी।” श्रद्धा यानी विश्वास, और सबूरी यानी धैर्य। आज करोड़ों भक्त इन्हीं दो शब्दों को जीते हैं। और उनके नाम – “ॐ साईं राम” – को दिल की गहराई से…
काशी में एक मान्यता है: जो काल भैरव की अनुमति के बिना वहाँ रहता है, वह एक पल भी नहीं रह सकता। काशी के “कोतवाल” यही हैं – काल भैरव। और फिर भी अधिकतर लोग उनका नाम सुनते ही एक कदम पीछे हट जाते हैं, जैसे यह नाम सिर्फ तंत्र-साधकों के लिए हो। यह भ्रम…
नवरात्रि के नौ दिन – और हर दिन एक अलग देवी। अधिकतर लोग नवरात्रि मनाते हैं, उपवास करते हैं, लेकिन नव दुर्गा के नौ नाम क्रम में जपने की एक सरल और गहरी साधना से चूक जाते हैं। यह क्रम-जप नवरात्रि को केवल उत्सव से साधना में बदल देता है – और यह साधना उतनी…
देवी दुर्गा के मंत्रों में एक मंत्र ऐसा है जो छोटा होने के बावजूद बहुत गहरा है: “ॐ दुं दुर्गायै नमः।” इसमें एक ऐसा शब्द है जो शायद पहली बार पढ़ने पर अटपटा लगे – “दुं।” यह टाइपो नहीं है। यह देवी दुर्गा का बीज अक्षर (बीज मंत्र) है। और जो लोग बिना इसका अर्थ…