जय अम्बे गौरी: माँ दुर्गा की आरती – संपूर्ण पाठ, अर्थ सहित
“जय अम्बे गौरी” माँ दुर्गा की सबसे प्रचलित और सम्पूर्ण आरती है। इस पृष्ठ पर आरती के सभी 11 पदों का पाठ हिंदी में दिया गया है, साथ में प्रत्येक पंक्ति का सरल अर्थ भी।
स्रोत: यह आरती पारंपरिक उत्तर भारतीय भक्ति परंपरा से ली गई है और सैकड़ों वर्षों से मंदिरों एवं घरों में गाई जाती रही है। यह सार्वजनिक लोक-आरती (public domain) है।
टेक (Refrain – प्रत्येक पद के बाद)
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥अर्थ: हे गौरी (उज्ज्वल) और श्यामा (दिव्य अंधकार की) अम्बे माँ – आपकी जय हो। हरि (विष्णु), ब्रह्मा और शिव रात-दिन आपका ध्यान करते हैं।
आरती के 11 पद
पद 1
माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उजल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥अर्थ: माँ की माँग में सिंदूर शोभायमान है, मस्तक पर कस्तूरी (मृगमद) का तिलक है। दोनों नेत्र उज्ज्वल एवं चंद्रमा के समान सुंदर मुख वाली हैं।
पद 2
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥अर्थ: सोने के समान देह, लाल वस्त्र पहने हुए शोभायमान हैं। गले में लाल पुष्पों की माला कंठ पर सुशोभित है।
पद 3
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर मुनि जन सेवत, तिनके दुखहारी॥अर्थ: सिंह पर सवार होकर शोभायमान हैं, हाथ में खड्ग (तलवार) और खप्पर (कपाल) धारण किए हुए हैं। देवता, मनुष्य और मुनि सभी उनकी सेवा करते हैं – वे सबके दुख हरने वाली हैं।
पद 4
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्र मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योती॥अर्थ: कानों में कुंडल शोभायमान हैं, नाक के अग्रभाग पर मोती सुशोभित है। करोड़ों चंद्र और सूर्य के समान तेज से दीप्तिमान हैं।
पद 5
शम्भु ह्वैवत नंदी, ब्रह्मा विष्णु साजत।
ऋद्धि-सिद्धि और निधि, मोक्ष को पावत॥अर्थ: शम्भु (शिव) के साथ नंदी, ब्रह्मा और विष्णु भी माँ की सेवा में रत हैं। उनके भक्त ऋद्धि, सिद्धि, नवनिधि और अंत में मोक्ष भी प्राप्त करते हैं।
पद 6
दुर्गम काज जगत के, तुम बिन कौन करे।
कौन अबल सब बलि बल, तुम धन को हरे॥अर्थ: जगत के कठिन काम तुम्हारे बिना कौन करे? कौन ऐसा बल है जो तुम्हारे बल के सामने टिक सके? तुम्हीं सबका धन और बल हो।
पद 7
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवाञ्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥अर्थ: चार भुजाएं अत्यंत शोभायमान हैं, वरमुद्रा (वरदान देने की मुद्रा) धारण किए हुए हैं। इनकी सेवा करने वाले स्त्री-पुरुष मनचाहा फल प्राप्त करते हैं।
पद 8
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥अर्थ: सोने की थाल में अगर (अगरु) और कपूर की बाती से आरती उतारी जा रही है। श्रीमालकेतु (देवी मंदिर) में करोड़ों रत्नों की ज्योति शोभायमान है।
पद 9
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवाञ्छित पावे॥अर्थ: श्री अम्बे माँ की यह आरती जो कोई भी भक्त गाता है – शिवानंद स्वामी कहते हैं – वह मनचाहा फल प्राप्त करता है।
पद 10
चंद्र-वदनी मृगनयनी, वेद-विधि जानत।
सब विद्या की दात्री, विद्यमान मानत॥अर्थ: चंद्रमुखी, मृगनयनी (हिरण-सी आँखों वाली), वेद-विधि की ज्ञाता हैं। वे सभी विद्याओं की दात्री हैं – सर्वत्र विद्यमान हैं।
पद 11
भव सागर से तारो, हे माँ जगदम्बे।
चरणों की दासी हूँ, आई हूँ द्वार पे॥अर्थ: हे जगदम्बे माँ! इस भवसागर से तार दो। मैं आपके चरणों की दासी हूँ और आपके द्वार पर आई हूँ। (भक्त की अंतिम प्रार्थना – शरणागति का भाव)
आरती का भाव: माँ गौरी और श्यामा एक ही क्यों हैं
आरती के टेक में दो नाम हैं – “गौरी” और “श्यामा” – जो विरोधाभासी लगते हैं: गौरी का अर्थ है उज्ज्वल, श्वेत; श्यामा का अर्थ है गहरे रंग की, रात्रि जैसी। यह विरोध जानबूझकर है। देवी तत्त्वतः दोनों हैं – प्रकाश और रात्रि, सृष्टि और संहार, कोमलता और शक्ति। पार्वती-रूप में गौरी और काली-रूप में श्यामा – दोनों एक ही महाशक्ति के दो पहलू हैं। इसीलिए यह आरती महादेवी की आरती मानी जाती है, किसी एक स्वरूप की नहीं।
आरती कैसे गाएं – विधि
जय अम्बे गौरी आरती गाने की पारंपरिक विधि:
- समय: संध्या आरती (शाम 6-7 बजे) सबसे उचित है। नवरात्रि में प्रातः और संध्या दोनों समय गाएं।
- थाल और दीप: कपूर या घी का दीपक जलाकर घड़ी की दिशा में (clockwise) माँ की प्रतिमा के सामने 7 बार घुमाएं। प्रत्येक पद के बाद थाल घुमाते रहें।
- टेक (refrain) का महत्व: प्रत्येक पद के अंत में “जय अम्बे गौरी” टेक सामूहिक रूप से गाना भक्त-समुदाय को एकजुट करता है। मंदिरों में ढोल-मंजीरे के साथ यह आरती गाई जाती है।
- जप के साथ आरती: आरती एक पूर्ण पूजा-चक्र का हिस्सा है। यदि आप माँ दुर्गा के नाम का जप (जैसे “जय माता दी”, “ॐ दुर्गायै नमः”) भी करते हैं, तो Devta App पर अपने जप का हिसाब रखें – आरती गाने के बाद और जप से पहले मन स्वाभाविक रूप से शांत हो जाता है।
- नवरात्रि में विशेष: नवरात्रि के 9 दिनों में प्रतिदिन यह आरती गाने से विशेष फल मिलता है। कई परिवारों में यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या यह आरती बिना व्रत के गा सकते हैं?
हाँ। यह आरती किसी भी दिन, किसी भी अवस्था में गाई जा सकती है। व्रत की अनिवार्यता नहीं है। माँ की भक्ति के लिए केवल शुद्ध मन पर्याप्त है।
क्या पुरुष यह आरती गा सकते हैं?
बिल्कुल। यह आरती स्त्री-पुरुष सभी के लिए समान रूप से उचित है। शास्त्रों में भी ऐसा कोई विधान नहीं है जो पुरुषों को दुर्गा आरती से वंचित करे।
जय अम्बे गौरी और दुर्गा चालीसा में क्या अंतर है?
आरती पूजा का समापन-अंग है – यह देवी की उपस्थिति का साक्षात्कार करने का भाव है। चालीसा एक लंबा स्तोत्र है जो देवी की कथा और गुणों का वर्णन करता है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं, प्रतिस्पर्धी नहीं।
जय अम्बे गौरी आरती में कितने पद हैं?
जय अम्बे गौरी आरती में कुल 11 पद (छंद) हैं, प्रत्येक के बाद ‘जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी’ टेक (refrain) आती है। यह परंपरागत माँ दुर्गा की मुख्य आरती है।
जय अम्बे गौरी आरती कब गाई जाती है?
यह आरती नवरात्रि में प्रतिदिन, दुर्गा पूजा में, और घर-मंदिर की शाम की पूजा में गाई जाती है। शुक्रवार को भी विशेष रूप से माँ की आरती की जाती है।
जय अम्बे गौरी और जय अम्बे जगदम्बे में क्या अंतर है?
‘जय अम्बे गौरी’ एक विशेष, पूर्ण आरती है जिसमें 11 पद हैं और यह सबसे अधिक गाई जाने वाली दुर्गा आरती है। ‘जय अम्बे जगदम्बे’ एक अलग, छोटी भजन-धुन है।
संबंधित लेख