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गीता में कृष्ण ने खुद कहा: यज्ञों में मैं नाम-जप हूं
वैदिक काल में यज्ञ करना आसान काम नहीं था। अश्वमेध यज्ञ एक साल तक चलता था – सैकड़ों ऋत्विज, विशेष लकड़ियाँ, निर्धारित अनाज, हज़ारों मंत्रोच्चारण और हर पल की शुद्धता। राजसूय यज्ञ में राजाओं को अपनी विश्व-विजय सिद्ध करनी पड़ती थी। अग्निहोत्र, ज्योतिष्टोम, पुत्रकामेष्टि – हर यज्ञ के अपने सैकड़ों नियम थे। एक चूक और…
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ॐ जय लक्ष्मी माता: पूरी आरती अर्थ सहित
यह पृष्ठ माँ लक्ष्मी की सर्वाधिक प्रचलित आरती “ॐ जय लक्ष्मी माता” का संपूर्ण पाठ प्रस्तुत करता है – मुखड़ा और सातों पद, हर पंक्ति के अर्थ सहित। यह परंपरागत आरती सार्वजनिक भक्ति-विरासत (public domain) का हिस्सा है और सदियों से दीपावली, शुक्रवार की पूजा और प्रतिदिन की संध्या-आरती में गाई जाती है। ॐ जय…