उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में एक ऐसा धाम है जहाँ “नमस्ते” की जगह “राधे-राधे” से अभिवादन होता है। जहाँ पत्थर बोलते हैं तो राधा रानी की लीला सुनाते हैं। जहाँ होली में महिलाएं पुरुषों को लाठी मारती हैं और पूरी दुनिया देखने आती है। यह है बरसाना – राधा रानी का जन्मस्थान, वह पवित्र…
यह पृष्ठ श्री राधा चालीसा का संपूर्ण पाठ प्रस्तुत करता है – सभी 40 चौपाइयां, 3 दोहे, और हर पंक्ति का सरल हिंदी भावार्थ। यह एक पारंपरिक रचना है जो राधा रानी के दिव्य स्वरूप, उनके कृष्ण-प्रेम और उनकी महिमा का विस्तृत वर्णन करती है। भक्ति परंपरा में राधा चालीसा को विशेष स्थान प्राप्त है।…
ब्रज में एक कहावत है – “राधे बिन कान्हा अधूरे।” कृष्ण को जानना है तो राधा को जानना होगा। लेकिन राधा रानी की कथा अधिकांश लोग अधूरी जानते हैं – बस इतना कि वे कृष्ण की प्रिया थीं। वास्तव में, वैष्णव परम्परा में राधा रानी को श्री कृष्ण की आत्मा, उनकी आह्लादिनी शक्ति और समस्त…
राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र – यहाँ सभी 13 श्लोकों का संपूर्ण पाठ और हर पद का भावार्थ हिंदी में दिया गया है। यह स्तोत्र ऊर्ध्वाम्नाय तंत्र से लिया गया है और वैष्णव परम्परा में राधा-उपासना के सर्वाधिक मार्मिक स्तोत्रों में से एक माना जाता है। स्तोत्र का परिचय और स्रोत इस स्तोत्र का पूरा नाम…
राधा रानी की संपूर्ण आरती – “आरती श्री वृषभानुसुता की” – यहाँ हर पद का अर्थ सहित दी गई है। यह परम्परागत पावन आरती वृन्दावन और बरसाना के मंदिरों में प्रतिदिन मंगला और संध्या आरती के समय गाई जाती है। नीचे पूरा पाठ और भावार्थ एक साथ मिलेगा। आरती श्री वृषभानुसुता की – संपूर्ण पाठ…
हर साल लाखों लोग नाम जप शुरू करना चाहते हैं – राम का, कृष्ण का, शिव का। लेकिन एक सवाल उन्हें रोक देता है: “क्या बिना गुरु-दीक्षा के जप कर सकते हैं? कहीं यह गलत तो नहीं होगा?” अगर आप भी इस दुविधा में हैं, तो उत्तर है – हाँ, नाम जप के लिए गुरु-दीक्षा…
भारत में हज़ारों भक्त ऐसे हैं जो जपना चाहते हैं – पर जपते नहीं। क्योंकि एक डर उन्हें रोकता है। “कहीं गलत मंत्र न जप लूँ।” “माला का नियम टूट गया तो?” “अशुद्ध होने पर जपा तो नुकसान होगा।” यह डर कहाँ से आया? और क्या यह सच्चा है? उत्तर आपको हैरान कर सकता है।…
माला जप करते लगभग हर उपासक ने यह देखा होगा – जब सुमेरु मनके के पास पहुँचते हैं, उँगलियाँ रुक जाती हैं, माला पलट जाती है, और जप आगे बढ़ता है। यह इतना स्वाभाविक है कि ज़्यादातर लोग इसे बिना सोचे करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी रुककर यह पूछा – यह नियम आया कहाँ…
40 दिन बीत गए। रोज़ एक माला जप किया। और अब मन में यह सवाल है: “कुछ तो बदलना चाहिए था। पर क्या बदला?” यह सवाल अकेले आप नहीं पूछ रहे। लाखों लोग नाम जप शुरू करते हैं और जब “21 दिन” या “40 दिन” के बाद कोई दिखने वाला बदलाव नहीं होता, तो या…
सुबह के सात बज रहे हैं। नहाना बाकी है, रसोई का काम है, और मन है कि भगवान का नाम ले ले। पर एक शंका रोकती है: “क्या अशुद्ध हूँ, तो जप होगा क्या? भगवान बुरा तो नहीं मानेंगे?” यह शंका करोड़ों भक्तों के मन में रोज़ आती है। और कभी-कभी इसी शंका में जप…