वृंदावन की गलियों में, भजनों के बीच, अगर ध्यान से सुनें तो दो तरह के भक्त मिलते हैं। एक “राधा रानी की जय” बोलते हैं – ऊँची आवाज़, भीड़ में गूँजती हुई। दूसरे, आँखें कुछ और नरम लिए, धीरे से कहते हैं: “राधिका…” – जैसे कोई बात किसी से नहीं, सिर्फ खुद से कर रहा…