राम स्तुति और श्री राम आरती अर्थ सहित
इस पृष्ठ पर आपको राम स्तुति का संपूर्ण पाठ – रामचरितमानस के अरण्यकांड और उत्तरकांड की परंपरागत राम स्तुतियाँ – तथा श्री राम आरती (आरती कीजै हनुमान लला की) का पूरा पाठ हिंदी अर्थ सहित मिलेगा। ये सभी रचनाएँ गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस और पद्म पुराण की पारंपरिक परंपरा पर आधारित हैं। प्रत्येक श्लोक/पद के नीचे उसका सरल हिंदी भावार्थ दिया गया है।
राम स्तुति – संपूर्ण पाठ अर्थ सहित
राम स्तुति वह प्रार्थना है जो प्रभु श्रीराम के गुणों, रूप और महिमा का गान करती है। रामचरितमानस में अनेक स्थानों पर ऋषि-मुनियों द्वारा की गई राम स्तुतियाँ मिलती हैं। यहाँ तीन प्रमुख पारंपरिक राम स्तुतियाँ दी गई हैं।
1. राम रामेति रामेति (पद्म पुराण)
यह श्लोक पद्म पुराण से है जिसमें शिवजी ने माता पार्वती को राम नाम की महिमा बताई। इसे “तारक मंत्र” भी कहते हैं।
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
सहस्रनाम तत्तुल्यं राम नाम वरानने ॥
भावार्थ: हे वरानने (सुन्दर मुखी पार्वती)! मैं ‘राम, राम, राम’ इस मनोरम नाम में रमण करता हूँ। यह एक राम नाम विष्णु के हजार नामों (विष्णु सहस्रनाम) के समान है।
2. अत्रि मुनि राम स्तुति – अरण्यकांड (रामचरितमानस)
जब भगवान राम वनवास काल में ऋषि अत्रि के आश्रम पहुँचे, तब अत्रि मुनि ने यह संस्कृत स्तुति की। यह रामचरितमानस, अरण्यकांड में संकलित है।
नमामि भक्त वत्सलम् । कृपालु शील कोमलम् ॥
भजामि ते पदांबुजम् । अकामिनाम् स्वधामदम् ॥
भावार्थ: भक्तों पर वात्सल्य रखने वाले, कृपालु और कोमल स्वभाव के प्रभु को मैं नमस्कार करता हूँ। निस्वार्थ भाव से भजने वालों को अपना धाम देने वाले आपके चरण-कमलों का मैं भजन करता हूँ।
निकाम श्याम सुंदरम् । भवाम्बुनाथ मंदरम् ॥
प्रफुल्ल कंज लोचनम् । मदादि दोष मोचनम् ॥
भावार्थ: अति सुंदर श्यामवर्ण, संसार-सागर को मंथन करने वाले मंदर-पर्वत समान, प्रफुल्लित कमल-नेत्रों वाले और मद-लोभ जैसे दोषों से मुक्ति दिलाने वाले प्रभु को नमन।
प्रलंब बाहु विक्रमम् । प्रभोऽप्रमेय वैभवम् ॥
निषंग चाप सायकम् । धरम् त्रिलोक नायकम् ॥
भावार्थ: लम्बी भुजाओं में विक्रम भरे, अपार वैभव के स्वामी, तरकश-धनुष-बाण धारण करने वाले तीनों लोकों के नायक प्रभु राम को नमन।
दिनेश वंश मंदनम् । महेश चाप खंडनम् ॥
मुनींद्र संत रंजनम् । सुरारि वृंद भंजनम् ॥
भावार्थ: सूर्यवंश के भूषण, शंकर के धनुष को तोड़ने वाले, मुनीश्वरों और संतों को आनंद देने वाले, देवताओं के शत्रुओं का नाश करने वाले प्रभु राम को प्रणाम।
मनोज वैरि वंदितम् । अजादि देव सेवितम् ॥
विशुद्ध बोध विग्रहम् । समस्त दूषणापहम् ॥
भावार्थ: कामदेव के शत्रु शंकर द्वारा वंदित, ब्रह्मा आदि देवताओं द्वारा सेवित, विशुद्ध ज्ञान के साक्षात् स्वरूप और समस्त दोषों को हरने वाले प्रभु को नमस्कार।
नमामि इंदिरा पतिम् । सुखाकरम् सताम् गतिम् ॥
भजे सशक्ति सानुजम् । शची पति प्रियानुजम् ॥
भावार्थ: लक्ष्मीपति, संतों के सुख के स्रोत और आश्रय को मैं नमन करता हूँ। शक्ति (सीता) और अनुज (लक्ष्मण) सहित, इंद्र के प्रिय छोटे भाई (वामन अवतार की परंपरा का संकेत) प्रभु राम को भजता हूँ।
3. राज्याभिषेक स्तुति – उत्तरकांड (रामचरितमानस)
अयोध्या में श्रीराम के राज्याभिषेक के अवसर पर देवताओं ने यह स्तुति की। यह उत्तरकांड में संकलित है।
जय राम रमारमणम् शमनम् । भव ताप भयाकुल पाहि जनम् ॥
अवधेश सुरेश रमेश विभो । शरणागत माँगत पाहि प्रभो ॥
भावार्थ: हे राम! आप रमा (लक्ष्मी) के प्रिय, शांति देने वाले हैं – संसार के ताप और भय से पीड़ित जनों की रक्षा करें। हे अयोध्या के ईश्वर, देवताओं के स्वामी, रमा के पति! शरण में आए जनों की रक्षा करें।
मद मोह महा ममता रजनी । तम पुंज दिवाकर तेज अनी ॥
हति नाथ अनाथनि पाहि हरे । विषया बन पाँवर भूलि परे ॥
भावार्थ: मद, मोह और ममता की घनी रात्रि के अंधकार को दूर करने वाले सूर्य-प्रकाश स्वरूप। हे नाथ! अनाथों की रक्षा करें – जो विषय-वन में भटक गए हैं उन्हें बचाएँ।
तव नाम जपामि नमामि हरी । भव रोग महागद मान अरी ॥
गुन सील कृपा परमायतनम् । प्रनमामि निरंतर श्रीरमनम् ॥
भावार्थ: हे हरि! मैं आपका नाम जपता हूँ, आपको नमन करता हूँ – आप संसार-रोग और अहंकार के शत्रु हैं। गुण, शील और कृपा के परम आश्रय श्रीरमण को मैं निरंतर प्रणाम करता हूँ।
बार बार बर मागउं हरषि देहु श्रीरंग ।
पद सरोज अनपायनी भगति सदा सतसंग ॥
भावार्थ (दोहा): बार-बार यही वरदान माँगता हूँ – हे श्रीरंग! प्रसन्नता से दीजिए: आपके चरण-कमलों में अटल भक्ति और सदा सत्संग।
स्रोत: ये राम स्तुतियाँ गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस (अरण्यकांड और उत्तरकांड) तथा पद्म पुराण की पारंपरिक परंपरा पर आधारित हैं। पाठ स्रोत: sanskritdocuments.org
राम स्तुति पाठ विधि
- प्रातःकाल स्नान के बाद या संध्या पूजा में राम स्तुति का पाठ करें।
- पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करके बैठें, मन को शांत रखें।
- प्रत्येक श्लोक को धीरे-धीरे पढ़ें और अर्थ को हृदय में धारण करें।
- स्तुति के बाद श्री राम जय राम जय जय राम का कम से कम 108 बार जप करें।
- नियमित पाठ से मन की अशांति दूर होती है और राम-भक्ति गहरी होती है।
श्री राम आरती – आरती कीजै हनुमान लला की (संपूर्ण पाठ अर्थ सहित)
राम मंदिरों में पूजा की समाप्ति पर “आरती कीजै हनुमान लला की” गाई जाती है क्योंकि हनुमानजी श्रीराम के परम भक्त और दरबार के प्रतिनिधि हैं। इस आरती में हनुमानजी के राम-सेवा के कार्यों का वर्णन है और इसे श्री राम की पूजा में गाना परंपरागत है। यह पारंपरिक रचना है जो पीढ़ियों से राम-भक्ति परंपरा में गाई जाती है।
आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
भावार्थ (धुव्रपद): हनुमानजी की आरती करिए – जो श्रीरघुनाथ (राम) की अद्भुत शक्ति/कला के प्रतीक हैं और दुष्टों का दमन करने वाले हैं।
जाके बल से गिरवर काँपे ।
रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई ।
संतन के प्रभु सदा सहाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥
भावार्थ: जिनके बल से पर्वत भी काँपते हैं, जिनके निकट रोग और दोष आने की हिम्मत नहीं करते – वे अंजना के पुत्र महाबलशाली हनुमान, संत-भक्तों के प्रभु और सदा सहायक हैं।
दे बीरा रघुनाथ पठाए ।
लंका जलाय सिया सुधि लाए ॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।
जात पवनसुत बार न लाई ॥
भावार्थ: श्रीरघुनाथ ने पान (बीड़ा) देकर हनुमानजी को भेजा – उन्होंने लंका जलाकर सीताजी का समाचार लाए। समुद्र की खाई और अभेद्य किले वाली लंका तक पहुँचने में पवनपुत्र को एक पल भी नहीं लगा।
लंका जारि असुर सँहारे ।
सियारामजी के काज सँवारे ॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे ।
आणि सजीवन प्राण उबारे ॥
भावार्थ: लंका जलाई, असुरों का संहार किया और सीताराम का कार्य सँवारा। जब लक्ष्मण प्रातःकाल मूर्छित हो गए तो हनुमानजी संजीवनी बूटी लाकर उनके प्राण बचाए।
पैठी पाताल तोरि जम कारे ।
अहिरावण की भुजा उखाड़े ॥
बायें भुजा असुरदल मारे ।
दाहिने भुजा सन्तजन तारे ॥
भावार्थ: पाताल में जाकर यमराज के पाश तोड़े और अहिरावण की भुजा उखाड़ी। बायीं भुजा से असुर-सेना को मारा तो दाहिनी भुजा से संत-जनों का उद्धार किया – दोनों भुजाएँ दो कार्यों के लिए।
सुर नर मुनि आरती उतारें ।
जय जय जय हनुमान उचारें ॥
कंचन थार कपूर लौ छाई ।
आरती करत अंजना माई ॥
भावार्थ: देवता, मनुष्य और मुनि – सभी आरती उतारते हैं और “जय जय जय हनुमान” पुकारते हैं। सोने की थाल में कर्पूर की लौ जलाकर माता अंजना स्वयं अपने पुत्र की आरती करती हैं।
जो हनुमानजी की आरती गावे ।
बसि बैकुण्ठ परम पद पावे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
भावार्थ (समापन): जो इस आरती को श्रद्धापूर्वक गाता है, वह बैकुण्ठ में निवास करने का परम पद प्राप्त करता है। इसलिए हनुमानजी – रघुनाथ की कला के प्रतीक – की आरती करते रहें।
यह आरती पारंपरिक राम-भक्ति परंपरा पर आधारित है और पीढ़ियों से राम मंदिरों में गाई जाती है। पाठ स्रोत: drikpanchang.com और अन्य पारंपरिक स्रोत।
इस स्तुति और आरती का नियमित पाठ कैसे करें
राम स्तुति और आरती का नियमित पाठ करने के साथ-साथ राम नाम का जप सबसे सरल और प्रभावशाली साधना है। Devta App के राम नाम जप काउंटर से आप अपनी प्रतिदिन की जप संख्या का हिसाब रख सकते हैं।
- प्रातःकाल: स्नान के बाद राम स्तुति का पाठ करें, फिर 108 बार “श्री राम जय राम जय जय राम” का जप करें।
- संध्या पूजा: दीप जलाकर “आरती कीजै हनुमान लला की” गाएँ – यह राम पूजा का समापन करती है।
- जप की गिनती: Devta App में जप काउंटर से रोज की माला गिनें। आपकी गिनती account-synced रहती है – फोन बंद होने पर भी सुरक्षित।
- परिवार के साथ: App में पूरे परिवार के लिए अलग-अलग जप काउंटर बना सकते हैं और मिलकर संकल्प पूरा कर सकते हैं।
अधिक पढ़ें: राम रक्षा स्तोत्र संपूर्ण पाठ अर्थ सहित – श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन – पूरा पाठ अर्थ – राम चालीसा संपूर्ण पाठ अर्थ सहित
PDF नोट: इस पाठ का PDF संस्करण जल्द उपलब्ध होगा।
राम स्तुति किसने लिखी और कब पढ़नी चाहिए?
रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने कई स्थानों पर राम स्तुति लिखी है – अरण्यकांड में अत्रि मुनि स्तुति, उत्तरकांड में राज्याभिषेक स्तुति आदि। ‘राम रामेति रामेति’ श्लोक पद्म पुराण से है जिसे शिवजी ने पार्वती को बताया। राम स्तुति प्रातःकाल पूजा से पहले या संध्याकाल में पढ़ना सर्वोत्तम है।
आरती कीजै हनुमान लला की – यह राम आरती कैसे है?
हनुमानजी श्रीराम के परम भक्त और दरबार के प्रतिनिधि हैं। इसीलिए राम मंदिरों में पूजा की समाप्ति पर ‘आरती कीजै हनुमान लला की’ गाई जाती है – यह राम की उपासना में हनुमान की भूमिका को सम्मान देती है। इस आरती में हनुमानजी के राम-कार्यों का वर्णन है।
क्या Devta App में राम नाम जप की गिनती रख सकते हैं?
हाँ। Devta App में राम नाम जप काउंटर से आप हर माला की गिनती रख सकते हैं। आपकी जप संख्या account-synced रहती है – फोन बदलने या बंद होने पर भी गिनती सुरक्षित रहती है। परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर संकल्प पूरा करने की सुविधा भी है।
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