खाटू श्याम आरती - khatu-shyam-aarti-aur-chalisa-sampurn-path-arth

खाटू श्याम जी की आरती और चालीसा: संपूर्ण पाठ और अर्थ – एक ही जगह

श्री खाटू श्याम जी की आरती और चालीसा – दोनों पारंपरिक रचनाएं – यहाँ हिंदी अर्थ सहित पूरी दी गई हैं। जो भक्त एक ही जगह पर आरती और चालीसा दोनों का पाठ करना चाहते हैं, उनके लिए यह पृष्ठ है।

ये दोनों रचनाएं पारंपरिक हैं और सार्वजनिक भक्ति संगीत का हिस्सा हैं।

श्री श्याम बाबा की आरती (अर्थ सहित)

“ॐ जय श्री श्याम हरे” के नाम से प्रचलित यह आरती खाटू धाम के मंदिर में दिन में पाँच बार होती है। हर पंक्ति के साथ उसका सरल हिंदी अर्थ दिया गया है।

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥

अर्थ (टेक / मुखड़ा): हे श्याम बाबा, आपकी जय हो। आप खाटू धाम में अपने अनुपम – किसी से तुलना न होने वाले – स्वरूप में विराजमान हैं।

रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे।
तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े॥

अर्थ: आप रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजते हैं और सेवक आपके ऊपर चंवर ढुलाते हैं। आपने केसरिया वस्त्र धारण किए हैं और कानों में कुंडल सुशोभित हैं।

गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट धरे।
खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले॥

अर्थ: आपके गले में पुष्पों की माला है और सिर पर मुकुट सुशोभित है। आपके सामने धूप की अग्नि जल रही है और दीपक की ज्योति प्रकाशमान है।

मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे।
सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे॥

अर्थ: सोने की थाल में मोदक, खीर और चूरमे का भोग भरा है। सेवक प्रतिदिन भोग लगाकर आपकी निष्ठा से सेवा करते हैं।

झांझ कटोरा और घडियावल, शंख मृदंग घुरे।
भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे॥

अर्थ: झांझ, कटोरा, घड़ियाल, शंख और मृदंग के स्वर मंदिर में गूंजते हैं। भक्तजन आरती गाते हैं और जय-जयकार करते हैं।

जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे।
सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे॥

अर्थ: जो श्याम बाबा का ध्यान करता है, उसे फल मिलता है और वह सब दुखों से उबर जाता है। भक्तजन अपने मुख से श्याम-श्याम का उच्चारण करते हैं।

श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे।
जपत दयामय स्वामी, मनवांछित फल पावे॥

अर्थ: जो भी इस आरती को गाता है और दयालु श्याम स्वामी का नाम जपता है, उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे।
हारे के सहारे बाबा, खाटू श्याम की जय॥

अर्थ: हे बाबा, आपने हमेशा अपने भक्तों के काम पूरे किए हैं। हारे हुए और निराश लोगों के एकमात्र सहारे – बाबा खाटू श्याम की जय हो।

आरती के बारे में अधिक जानकारी के लिए देखें: खाटू श्याम आरती – पूरा अर्थ और महत्व

खाटू श्याम चालीसा (अर्थ सहित)

चालीसा का शाब्दिक अर्थ है “चालीस” – यानी चालीस चौपाइयों की स्तुति। श्याम चालीसा में बाबा के दिव्य गुण, बर्बरीक की कथा और नाम-महिमा का वर्णन है। पहले दोहा, फिर चालीस चौपाइयां और अंत में समापन दोहा।

दोहा (प्रारंभ)

श्री गुरु चरणन ध्यान धर, सुमीर सच्चिदानंद।
श्याम चालीसा भजत हूँ, रच चौपाई छंद॥

अर्थ: श्री गुरु के चरणों में ध्यान लगाकर और सच्चिदानंद स्वरूप का स्मरण करके, मैं चौपाई छंद में श्याम चालीसा का पाठ करता हूं।

चौपाइयां

श्याम-श्याम भजि बारंबारा।
सहज ही हो भवसागर पारा॥

अर्थ: बार-बार श्याम-श्याम का भजन करो – इससे यह भवसागर सहज ही पार हो जाता है।

इन सम देव न दूजा कोई।
दिन दयालु न दाता होई॥

अर्थ: इनके समान कोई दूसरा देव नहीं है और इनसे बड़ा दीन-दयालु और दाता भी कोई नहीं।

भीम सुपुत्र अहिलावाती जाया।
कही भीम का पौत्र कहलाया॥

अर्थ: ये भीम के पुत्र घटोत्कच की अहिलावती से उत्पन्न हुए। कुछ ग्रंथों में इन्हें भीम का पौत्र (पोता) भी कहा गया है।

यह सब कथा कही कल्पांतर।
तनिक न मानो इसमें अंतर॥

अर्थ: यह कथा अनेक कल्पों से चली आ रही है – इसमें जरा भी संशय या भेद मत करो।

बर्बरीक विष्णु अवतारा।
भक्तन हेतु मनुज तन धारा॥

अर्थ: बर्बरीक विष्णु के ही अवतार हैं, जिन्होंने भक्तों के कल्याण के लिए मनुष्य शरीर धारण किया।

बासुदेव देवकी प्यारे।
जसुमति मैया नंद दुलारे॥

अर्थ: ये वासुदेव-देवकी के प्रिय और यशोदा मैया-नंद बाबा के दुलारे श्रीकृष्ण ही श्याम बाबा के रूप में खाटू में विराजते हैं।

मधुसूदन गोपाल मुरारी।
वृजकिशोर गोवर्धन धारी॥

अर्थ: मधुसूदन, गोपाल, मुरारी, ब्रजकिशोर, गोवर्धन धारण करने वाले – ये सब एक ही प्रभु श्याम के नाम हैं।

सियाराम श्री हरि गोबिंदा।
दिनपाल श्री बाल मुकुंदा॥

अर्थ: सीताराम, हरि, गोविंद, दीनों के पालनकर्ता और मुकुंद – ये सब एक ही परमात्मा के नाम हैं जो श्याम बाबा में प्रकट हैं।

दामोदर रण छोड़ बिहारी।
नाथ द्वारिकाधीश खरारी॥

अर्थ: दामोदर, रणछोड़, बिहारी, द्वारिकाधीश और खरारी – भगवान के ये सब दिव्य नाम और रूप श्याम बाबा में समाहित हैं।

राधाबल्लभ रुक्मणि कंता।
गोपी बल्लभ कंस हनंता॥

अर्थ: राधा के प्रियतम, रुक्मिणी के पति, गोपियों के प्रिय और कंस का संहार करने वाले – श्याम बाबा ही हैं।

मनमोहन चित चोर कहाए।
माखन चोरि-चारि कर खाए॥

अर्थ: वे मनमोहन और चित्त के चोर कहलाते हैं – वही जिन्होंने बचपन में माखन चुराकर खाया था।

मुरलीधर यदुपति घनश्यामा।
कृष्ण पतित पावन अभिरामा॥

अर्थ: मुरलीधर, यदुपति, घनश्याम और पतितों को पावन करने वाले – ये सुंदर कृष्ण ही खाटू श्याम के रूप में पूजित हैं।

मायापति लक्ष्मीपति ईशा।
पुरुषोत्तम केशव जगदीशा॥

अर्थ: माया के स्वामी, लक्ष्मी के पति, पुरुषोत्तम, केशव और समस्त जगत के ईश – ये सब नाम श्याम बाबा के ही हैं।

विश्वपति जय भुवन पसारा।
दीनबंधु भक्तन रखवारा॥

अर्थ: विश्व के स्वामी जिनका साम्राज्य समूचे भुवन में फैला है, वे दीनों के बंधु और भक्तों के रक्षक हैं।

प्रभु का भेद न कोई पाया।
शेष महेश थके मुनिराया॥

अर्थ: प्रभु का रहस्य कोई नहीं जान सका – शेषनाग, महेश (शिव) और ऋषि-मुनि सब थक गए पर पार नहीं पा सके।

नारद शारद ऋषि योगिंदर।
श्याम-श्याम सब रटत निरंतर॥

अर्थ: नारद मुनि, सरस्वती और महर्षिगण – सब निरंतर श्याम-श्याम रटते रहते हैं।

कवि कोदी करी कनन गिनंता।
नाम अपार अथाह अनंता॥

अर्थ: करोड़ों कवियों ने श्याम बाबा के नामों की गिनती करने की कोशिश की – पर उनके नाम अपार, अथाह और अनंत हैं।

हर सृष्टी हर सुख में भाई।
ये अवतार भक्त सुखदाई॥

अर्थ: हर सृष्टि और हर सुख में ये व्याप्त हैं। यह अवतार भक्तों को सुख प्रदान करने के लिए ही आया है।

ह्रदय माहि करि देखु विचारा।
श्याम भजे तो हो निस्तारा॥

अर्थ: हृदय में बैठकर विचार करो – यदि श्याम का भजन करोगे तो निश्चित रूप से उद्धार होगा।

कौर पढ़ावत गणिका तारी।
भीलनी की भक्ति बलिहारी॥

अर्थ: तोते को राम-नाम पढ़ाने वाली गणिका (वेश्या) का उद्धार हुआ और शबरी (भीलनी) की भक्ति पर तो बलिहारी जाना होगा – श्याम भक्ति में कोई भेद नहीं।

सती अहिल्या गौतम नारी।
भई श्रापवश शिला दुलारी॥

अर्थ: पतिव्रता अहिल्या, जो गौतम ऋषि की पत्नी थीं, श्राप के कारण पत्थर बन गई थीं।

श्याम चरण रज चित लाई।
पहुंची पति लोक में जाही॥

अर्थ: श्याम (राम) के चरण-धूलि के स्पर्श मात्र से उनका उद्धार हुआ और वे अपने पति के लोक को प्राप्त हुईं।

अजामिल अरु सदन कसाई।
नाम प्रताप परम गति पाई॥

अर्थ: अजामिल और कसाई सदन – दोनों ने नाम के प्रताप से परम गति पाई। नाम-भजन सबसे बड़ा तारणहार है।

जाके श्याम नाम अधारा।
सुख लहहि दुःख दूर हो सारा॥

अर्थ: जिसका आधार श्याम नाम है, उसे सुख मिलता है और उसके सारे दुख दूर हो जाते हैं।

श्याम सलोवन है अति सुंदर।
मोर मुकुट सिर तन पीतांबर॥

अर्थ: श्याम बाबा अत्यंत सुंदर और साँवले हैं। सिर पर मोर मुकुट और तन पर पीतांबर सुशोभित है।

गले बैजंती माल सुहाई।
छवि अनूप भक्तन मान भाई॥

अर्थ: गले में बैजंती माला सुंदर लग रही है। उनकी अनुपम छवि भक्तों के मन को बेहद भाती है।

श्याम-श्याम सुमिरहु दिन-राती।
श्याम दुपहरि कर परभाती॥

अर्थ: दिन-रात, दोपहर और सवेरे – हर समय श्याम-श्याम का स्मरण करते रहो।

श्याम सारथी जिस रथ के।
रोड़े दूर होए उस पथ के॥

अर्थ: जिस रथ के सारथी श्याम हों, उस पथ के सारे रोड़े और बाधाएं दूर हो जाती हैं – जैसे महाभारत में अर्जुन के साथ हुआ।

श्याम भक्त न कही पर हारा।
भीर परि तब श्याम पुकारा॥

अर्थ: श्याम का भक्त कहीं भी नहीं हारा। जब भी संकट पड़ा, उसने श्याम को पुकारा और श्याम ने सहायता की।

रसना श्याम नाम रस पी ले।
जी ले श्याम नाम के ही ले॥

अर्थ: जीभ से श्याम नाम के रस का पान कर और श्याम नाम के सहारे ही जी ले – यही सच्चा जीवन है।

संसारी सुख भोग मिलेगा।
अंत श्याम सुख योग मिलेगा॥

अर्थ: श्याम भजन से संसारिक सुख भी मिलेंगे और अंत में श्याम के परम सुख का योग भी होगा।

श्याम प्रभु हैं तन के काले।
मन के गोरे भोले-भाले॥

अर्थ: श्याम बाबा तन से काले हैं परंतु मन से गोरे, भोले और सरल स्वभाव के हैं – रंग से नहीं, भाव से पहचानो।

श्याम संत भक्तन हितकारी।
रोग-दोष अध नाशे भारी॥

अर्थ: श्याम बाबा संतों और भक्तों का हित करने वाले हैं तथा बड़े-बड़े रोग, दोष और पापों का नाश करते हैं।

प्रेम सहित जब नाम पुकारा।
भक्त लगत श्याम को प्यारा॥

अर्थ: जब भक्त प्रेम सहित श्याम का नाम पुकारता है, तो वह भक्त श्याम बाबा को प्रिय लगने लगता है।

खाटू में हैं मथुरावासी।
पारब्रह्म पूर्ण अविनाशी॥

अर्थ: मथुरा के वासी परब्रह्म, पूर्ण और अविनाशी प्रभु अब खाटू में विराजमान हैं – खाटू ही उनका कलयुगी तीर्थ है।

सुधा तान भरि मुरली बजाई।
चहु दिशि जहां सुनी पाई॥

अर्थ: उन्होंने अमृतमयी सुर भरकर मुरली बजाई जिसकी मधुर धुन चारों दिशाओं में सुनी गई।

वृद्ध-बाल जेते नारि नर।
मुग्ध भये सुनि बंशी स्वर॥

अर्थ: बूढ़े, बच्चे, स्त्री, पुरुष – जितने भी थे, सब बांसुरी का स्वर सुनकर मुग्ध हो गए।

हड़बड़ कर सब पहुंचे जाई।
खाटू में जहां श्याम कन्हाई॥

अर्थ: सब उतावले होकर दौड़े चले आए – खाटू में जहां श्याम कन्हाई विराजते हैं।

जिसने श्याम स्वरूप निहारा।
भव भय से पाया छुटकारा॥

अर्थ: जिसने भी श्याम बाबा का स्वरूप दर्शन किया, उसे संसार के भय और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल गई।

दोहा (समापन)

श्याम सलोने संवारे, बर्बरीक तनुधार।
इच्छा पूर्ण भक्त की, करो न लाओ बार॥

अर्थ: हे साँवले-सुंदर श्याम, बर्बरीक रूप धारण करने वाले! अपने भक्त की इच्छा पूरी करो और देर मत करो।

॥ इति श्री खाटू श्याम चालीसा ॥

चालीसा के बारे में विस्तार से जानने के लिए देखें: खाटू श्याम चालीसा – संपूर्ण पाठ विधि और अर्थ

आरती और चालीसा का पाठ कैसे करें

आरती और चालीसा अलग-अलग प्रयोजन के लिए हैं, इसलिए दोनों के पाठ का समय और तरीका थोड़ा अलग है।

आरती कब और कैसे करें

परंपरा में आरती दिन में दो बार की जाती है – सुबह उठकर और शाम को दीपक जलाने के बाद। खाटू धाम में प्रतिदिन पाँच आरतियां होती हैं – मंगला (सूर्योदय से पहले), श्रृंगार, भोग, संध्या और शयन। घर पर आप सुबह-शाम दीपक जलाकर आरती कर सकते हैं। विशेष दिनों में – सोमवार, गुरुवार और द्वादशी – आरती का विशेष महत्व माना जाता है।

चालीसा का पाठ कब और कैसे करें

चालीसा का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है। सामान्यतः सुबह स्नान के बाद पूजा स्थान पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुँह करके पाठ किया जाता है। 3, 7, 11 या 21 बार पाठ करना विशेष माना जाता है। फाल्गुन मेले (फाल्गुन शुक्ल दशमी-द्वादशी) और जन्माष्टमी पर चालीसा का पाठ विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

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श्याम बाबा की कृपा और नाम जप

आरती और चालीसा दोनों का एक काम है – मन को श्याम बाबा की ओर मोड़ना। आरती में जब आप “ॐ जय श्री श्याम हरे” गाते हैं तो मन भाव में डूबता है। चालीसा जब पढ़ते हैं तो बाबा का पूरा परिचय – उनकी कथा, उनके नाम, उनकी महिमा – मन में उतरती है। इसके बाद जो नाम-जप होता है – “श्याम श्याम” या “जय श्री श्याम” – वह इसी भाव की निरंतरता है।

चालीसा की चौपाई है: रसना श्याम नाम रस पी ले, जी ले श्याम नाम के ही ले। यानी जीभ को श्याम नाम का रस चखाओ – यही सबसे बड़ी भक्ति है। आरती और चालीसा उस नाम-रस की तैयारी हैं, नाम-जप उसका स्थायी अभ्यास।

श्याम नाम की महिमा और जप की विधि के बारे में विस्तार से जानें: खाटू श्याम नाम जप – विधि, मंत्र और माहात्म्य और श्याम नाम की महिमा और रहस्य

बर्बरीक की कथा जाने बिना श्याम बाबा का परिचय अधूरा रहता है: खाटू श्याम की कथा – बर्बरीक और शीशदान

आम भ्रम और सही जानकारी

भ्रम 1: आरती और चालीसा केवल मंगलवार को करनी चाहिए।
सही जानकारी: खाटू श्याम की भक्ति पर कोई एक दिन की बाध्यता नहीं है। मंगलवार का विशेष महत्व जरूर है – जैसे गुरुवार भी माना जाता है – लेकिन आरती और चालीसा किसी भी दिन की जा सकती है।

भ्रम 2: महिलाएं माहवारी के दिनों में चालीसा नहीं पढ़ सकतीं।
सही जानकारी: श्याम बाबा की भक्ति में कोई भेद नहीं। चालीसा में ऐसी कोई पात्रता की शर्त नहीं है। श्रद्धा और भाव ही एकमात्र आवश्यकता है।

भ्रम 3: चालीसा का पाठ उपवास रखकर ही फलदायी होता है।
सही जानकारी: उपवास आपकी श्रद्धा का प्रकटीकरण है – अनिवार्यता नहीं। बिना उपवास के भी नियमित चालीसा पाठ उतना ही पूर्ण है।

भ्रम 4: आरती और चालीसा दोनों एक ही हैं।
सही जानकारी: आरती एक छोटी स्तुति है – दर्शन के समय दीपक घुमाते हुए गाई जाती है। चालीसा 39-40 चौपाइयों का विस्तृत स्तोत्र है जिसमें बाबा की पूरी महिमा, कथा और नाम वर्णित हैं। दोनों का प्रयोजन और समय अलग है।

भ्रम 5: खाटू में जाए बिना आरती-चालीसा का पूरा फल नहीं मिलता।
सही जानकारी: खाटू धाम में दर्शन का अपना महत्व है, लेकिन घर पर भी शुद्ध भाव से की गई आरती और चालीसा पूर्ण मानी जाती है। परंपरा कहती है कि श्याम बाबा जहां भक्त के मन में विराजें, वही उनका धाम है।

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खाटू श्याम जी की आरती और चालीसा में क्या अंतर है?

आरती एक छोटी स्तुति है जो दर्शन के समय गाई जाती है, जबकि चालीसा 40 चौपाइयों का विस्तृत स्तोत्र है जिसमें श्याम बाबा का पूरा माहात्म्य वर्णित है।

खाटू श्याम की आरती और चालीसा कब पढ़ें?

परंपरा में सुबह और शाम के दर्शन समय आरती की जाती है; चालीसा का पाठ कभी भी – विशेषकर सोमवार-गुरुवार या फाल्गुन मेले में – किया जा सकता है।

क्या महिलाएं खाटू श्याम की चालीसा पढ़ सकती हैं?

हाँ, श्याम बाबा की भक्ति में कोई भेद नहीं। महिलाएं किसी भी समय इनकी आरती और चालीसा का पाठ कर सकती हैं।

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