दुर्गा माँ के 108 नाम - durga-maa-ke-108-naam-arth-sahit-ashtottara

दुर्गा माँ के 108 नाम अर्थ सहित – अष्टोत्तरशतनामावली

माँ दुर्गा के 108 नाम – जिन्हें अष्टोत्तरशतनामावली कहते हैं – हिंदू धर्म की सबसे पवित्र स्तुतियों में से एक हैं। “अष्टोत्तर” का अर्थ है एक सौ आठ, और “शतनामावली” का अर्थ है नामों की माला। इस पाठ में माँ दुर्गा के 108 दिव्य नामों का उच्चारण किया जाता है – हर नाम उनके एक विशेष स्वरूप, शक्ति या गुण को दर्शाता है। ये नाम देवी माहात्म्य, देवी भागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण जैसे प्राचीन शास्त्रों से लिए गए हैं।

माँ दुर्गा को इस सृष्टि की आदिशक्ति माना जाता है। वे दस भुजाओं वाली, सिंहवाहिनी, त्रिनेत्री देवी हैं जो अपने भक्तों की हर विपदा से रक्षा करती हैं। उनके 108 नाम उनकी असीम शक्ति के अलग-अलग आयामों को प्रकट करते हैं – कहीं वे महालक्ष्मी हैं, कहीं महाकाली, कहीं सरस्वती, कहीं भवानी। इन सभी नामों का जप करने से साधक को माँ के समस्त स्वरूपों का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है।

108 की संख्या हिंदू परंपरा में विशेष पवित्र मानी जाती है। सूर्य का व्यास पृथ्वी से 108 गुना है, पृथ्वी से सूर्य की दूरी सूर्य के व्यास की लगभग 108 गुना है, और मानव शरीर में 108 मर्म बिंदु माने जाते हैं। इसलिए 108 नामों का जप ब्रह्माण्ड की मूल शक्ति से जुड़ने का माध्यम बनता है। यही कारण है कि माला में भी 108 मनके होते हैं – ताकि हर मनके पर एक नाम का जप किया जा सके।

नवरात्रि के नौ दिनों में, शुक्रवार को, अष्टमी और नवमी तिथि को – और वैसे भी प्रतिदिन – इन 108 नामों का पाठ करने से माँ दुर्गा प्रसन्न होती हैं। जो भक्त नियमित रूप से इस अष्टोत्तरशतनामावली का पाठ करते हैं, उन पर माँ की विशेष कृपा बनी रहती है – भय दूर होता है, शत्रु परास्त होते हैं, और जीवन में मंगल की प्राप्ति होती है।

दुर्गा माँ के 108 नाम अर्थ सहित

नीचे दिए गए सभी 108 नाम पारंपरिक रूप में दातृ विभक्ति (दैवी नामावली) में दिए गए हैं, जैसे पूजा में बोला जाता है – जैसे “ॐ दुर्गायै नमः”।

1. दुर्गायै (Durgayai) दुर्गम संकट नाश करने वाली
2. शिवायै (Shivayai) मंगल और कल्याण की देवी
3. महालक्ष्म्यै (Mahalakshmyai) महाऐश्वर्य की अधिष्ठात्री
4. महागौर्यै (Mahagauryai) अत्यंत गौर वर्णवाली
5. चण्डिकायै (Chandikayai) प्रचण्ड शक्तिरूपा
6. सर्वज्ञायै (Sarvajnayai) सब कुछ जानने वाली
7. सर्वशक्त्यै (Sarvashakyai) सर्वशक्तिमान देवी
8. सर्वमंगलायै (Sarvamangalayai) सबका मंगल करने वाली
9. सत्यै (Satyai) पतिव्रता सती स्वरूपा
10. भद्रकाल्यै (Bhadrakalyai) कल्याणकारी काली रूपा
11. महाकाल्यै (Mahakalyai) महाकाल की आदिशक्ति
12. ब्राह्म्यै (Brahmyai) ब्रह्मा की शक्ति
13. माहेश्वर्यै (Maheshwaryai) शिव की शक्ति
14. कौमार्यै (Kaumaryai) स्कन्द (कार्तिकेय) की शक्ति
15. वैष्णव्यै (Vaishnavyai) विष्णु की शक्ति
16. वाराह्यै (Varahyai) वराह स्वरूप धारण करने वाली
17. नारसिंह्यै (Narasimhyai) नृसिंह स्वरूप धारिणी
18. इन्द्राण्यै (Indranyai) इन्द्र की शक्ति
19. शिवदूत्यै (Shivadútyai) शिव की दूती (संदेशवाहिका)
20. चामुण्डायै (Chamundayai) चण्ड और मुण्ड का नाश करने वाली
21. महिषासुरमर्दिन्यै (Mahishasuramardinyai) महिषासुर का नाश करने वाली
22. अम्बिकायै (Ambikayai) जगत जननी माँ
23. भवान्यै (Bhavanyai) संसार का भरण-पोषण करने वाली
24. जयायै (Jayayai) जय देने वाली
25. विजयायै (Vijayayai) सदा विजय देने वाली
26. जयन्त्यै (Jayantyai) जयस्वरूपिणी
27. मंगलायै (Mangalayai) मंगलकारिणी
28. काल्यै (Kalyai) काल को नष्ट करने वाली
29. भागवत्यै (Bhagavatyai) सर्वैश्वर्यसम्पन्ना भगवती
30. हेमावत्यै (Hemavatyai) सुवर्ण जैसी आभावाली
31. ईश्वर्यै (Ishwaryai) जगत की ईश्वरी
32. क्षमायै (Kshamayai) क्षमाशील, सब को क्षमा करने वाली
33. श्रद्धायै (Shraddhayai) श्रद्धाशक्तिस्वरूपा
34. धृत्यै (Dhrtiyai) धैर्यस्वरूपा
35. मेधायै (Medhayai) प्रतिभा और मेधाशक्ति की देवी
36. बुद्ध्यै (Buddhyai) बुद्धिशक्तिस्वरूपा
37. लज्जायै (Lajjayai) लज्जा (सदाचार) की देवी
38. पुष्ट्यै (Pushtiyai) पुष्टि और बल देने वाली
39. स्मृत्यै (Smrityai) स्मृतिशक्तिस्वरूपा
40. तुष्ट्यै (Tushtiyai) संतोष और तृप्ति देने वाली
41. शान्त्यै (Shantyai) शान्तिस्वरूपा
42. कान्त्यै (Kantyai) दीप्तिमान कान्तिस्वरूपा
43. इच्छायै (Ichhayai) इच्छाशक्तिस्वरूपा
44. क्रियायै (Kriyayai) क्रियाशक्तिस्वरूपा
45. ज्ञानायै (Jnanayai) ज्ञानशक्तिस्वरूपा
46. विद्यायै (Vidyayai) विद्या और ज्ञान देने वाली
47. स्वाहायै (Swahayai) यज्ञ की अग्नि में आहुति की देवी
48. स्वधायै (Swadhayai) पितरों की तृप्ति करने वाली
49. सरस्वत्यै (Sarasvatyai) वाणी और विद्या की देवी
50. लक्ष्म्यै (Lakshmyai) धन और सम्पदा की देवी
51. नन्दायै (Nandayai) आनन्द और प्रसन्नता देने वाली
52. भूत्यै (Bhutyai) समृद्धि और ऐश्वर्य देने वाली
53. चेतनायै (Chetanayai) समस्त प्राणियों की चेतनाशक्ति
54. कात्यायन्यै (Katyayanyai) कात्यायन ऋषि की पुत्री
55. स्कन्दमात्रे (Skandamatre) स्कन्द (कार्तिकेय) की माता
56. चन्द्रघण्टायै (Chandraghantayai) चन्द्रमा के समान घण्टा धारण करने वाली
57. कूष्माण्डायै (Kushmandayai) ब्रह्माण्ड की सृष्टि करने वाली
58. शैलपुत्र्यै (Shailaputryai) पर्वतराज हिमालय की पुत्री
59. कालरात्र्यै (Kalaratryai) काल को भी रात बनाने वाली भयंकर रूपा
60. सिद्धिदात्र्यै (Siddhidatryai) सिद्धियाँ प्रदान करने वाली
61. पार्वत्यै (Parvatyai) पर्वत-पुत्री, शिव-अर्धांगिनी
62. सिंहवाहिन्यै (Simhavahiniyai) सिंह पर आरूढ़ होने वाली
63. नारायण्यै (Narayanyai) नारायण की आदिशक्ति
64. त्रिनेत्रायै (Trinetrayai) तीन नेत्रोंवाली, त्रिकालदर्शी
65. शूलिन्यै (Shulinyai) त्रिशूल धारण करने वाली
66. चक्रिण्यै (Chakrinyai) सुदर्शन चक्र धारिणी
67. शंखिन्यै (Shankhinyai) शंख धारण करने वाली
68. खड्गिन्यै (Khadginyai) खड्ग (तलवार) धारण करने वाली
69. धनुर्धारिण्यै (Dhanurdharinyai) धनुष धारण करने वाली
70. पाशिन्यै (Pashinyai) पाश (रस्सी-अस्त्र) धारण करने वाली
71. जगदम्बायै (Jagadambayai) सम्पूर्ण जगत की माता
72. अपर्णायै (Aparnayai) पत्ते तक न खाकर कठोर तप करने वाली
73. उमायै (Umayai) उमा – हिमालय-पुत्री का पावन नाम
74. गौर्यै (Gauryai) गौर (उज्ज्वल) वर्णवाली
75. हरिप्रियायै (Haripriyayai) भगवान विष्णु की प्रिया
76. चण्डमुण्डनाशिन्यै (Chandamundanashinyai) चण्ड और मुण्ड दैत्यों का नाश करने वाली
77. रक्तबीजनाशिन्यै (Raktabijanashinyai) रक्तबीज दैत्य का नाश करने वाली
78. शुम्भनिशुम्भघातिन्यै (Shumbha-Nishumbhaghatiinyai) शुम्भ और निशुम्भ का वध करने वाली
79. मधुकैटभघातिन्यै (Madhukaitabhaghatiinyai) मधु और कैटभ असुरों का नाश करने वाली
80. कालिकायै (Kalikayai) कालिका स्वरूपिणी
81. कापालिन्यै (Kapalinyai) कपाल (खोपड़ी) की माला धारण करने वाली
82. महोदर्यै (Mahodaryai) विराट उदर में ब्रह्माण्ड धारण करने वाली
83. मुण्डमालिन्यै (Mundamalinyai) मुण्डों की माला धारण करने वाली
84. दैत्यदमन्यै (Daityadamanyai) दैत्यों का दमन करने वाली
85. पापहारिण्यै (Papaharinyai) भक्तों के पाप हरने वाली
86. भयहारिण्यै (Bhayaharinyai) भक्तों का भय दूर करने वाली
87. भवमोचिन्यै (Bhavamochinyai) संसार-बंधन से मुक्ति देने वाली
88. भक्तप्रियायै (Bhaktapriyayai) भक्तों की प्रिया माँ
89. भक्तवत्सलायै (Bhaktavatsalayai) भक्तों पर माँ-सी ममता रखने वाली
90. सर्वसिद्धिप्रदायिन्यै (Sarvasiddhipradayinyai) सभी सिद्धियाँ प्रदान करने वाली
91. सर्वज्ञानप्रदायिन्यै (Sarvajnanapradayinyai) सर्वज्ञान प्रदान करने वाली
92. सर्वमोक्षप्रदायिन्यै (Sarvamokshapradayinyai) सभी को मोक्ष प्रदान करने वाली
93. निर्गुणायै (Nirgunayai) गुणों से परे निर्गुण स्वरूपा
94. सगुणायै (Sagunayai) दिव्य गुणों से युक्त सगुण स्वरूपा
95. नित्यायै (Nityayai) नित्य, शाश्वत, अविनाशी
96. निर्मलायै (Nirmalayai) निर्मल और पवित्र स्वरूपा
97. विमलायै (Vimalayai) विमल, सर्वथा शुद्ध
98. अव्यक्तायै (Avyaktayai) इन्द्रियों से परे, अव्यक्त स्वरूपा
99. परमेश्वर्यै (Parameshwaryai) सर्वोच्च ईश्वरी शक्ति
100. त्रिलोकधारिण्यै (Trilokadhaarinyai) तीनों लोकों को धारण करने वाली
101. त्रिलोकपालिन्यै (Trilokapalinyai) तीनों लोकों की पालनकर्त्री
102. वज्रहस्तायै (Vajrahastayai) हाथ में वज्र धारण करने वाली
103. जगद्धात्र्यै (Jagaddhátryai) जगत का पोषण करने वाली धात्री
104. नित्यकल्याण्यै (Nityakalyanyai) नित्य कल्याण करने वाली
105. सर्वदेवनमस्कृतायै (Sarvadevanamasktrtayai) सभी देवताओं द्वारा वंदित
106. ब्रह्मविष्णुशिवस्तुतायै (Brahmavishnushivastutayai) ब्रह्मा, विष्णु और शिव द्वारा स्तुत
107. जगन्मायायै (Jaganmayayai) सम्पूर्ण जगत में व्याप्त माया स्वरूपा
108. सर्वकामप्रदायिन्यै (Sarvakamapradayinyai) सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली

ये सभी 108 नाम दाईं ओर ॐ … नमः के साथ जपे जाते हैं। जैसे: “ॐ दुर्गायै नमः”, “ॐ शिवायै नमः”, “ॐ महालक्ष्म्यै नमः” और इसी क्रम से सभी 108 नाम।

नाम जप की विधि – अष्टोत्तर शतनामावली कैसे जपें

दुर्गा माँ के 108 नामों का जप करना सरल है। नीचे दी गई विधि का पालन करें और माँ की कृपा पाएं।

  1. स्नान और शुद्धि: प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। लाल या पीले रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
  2. दीप और धूप प्रज्वलित करें: माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं, अगरबत्ती लगाएं और लाल फूल अर्पित करें।
  3. संकल्प लें: माँ के सामने हाथ जोड़कर संकल्प लें – “माँ दुर्गे, मैं आपके 108 नामों का जप करने जा रहा हूँ। मेरी भक्ति और समर्पण स्वीकार करें।”
  4. माला लें: रुद्राक्ष माला, स्फटिक माला या लाल चंदन की माला लें। माला में 108 मनके होते हैं – हर मनके पर एक नाम जपें।
  5. जप प्रारंभ करें: दाहिने हाथ में माला पकड़ें। अंगूठे और मध्यमा (बड़ी) उंगली से मनका फेरें। तर्जनी (इशारे वाली उंगली) का प्रयोग न करें। हर मनके पर एक नाम बोलें: “ॐ दुर्गायै नमः”, फिर “ॐ शिवायै नमः” – इसी क्रम से।
  6. मन एकाग्र रखें: जप के समय मन में माँ का स्वरूप – दस भुजाएं, सिंह, त्रिशूल, मुकुट – का ध्यान करें।
  7. समापन: 108 नाम पूर्ण होने पर माँ को प्रणाम करें और प्रसाद बांटें।

समय: प्रातःकाल सूर्योदय के पहले या सूर्योदय के समय यह जप करना सर्वोत्तम है। शाम को संध्या काल में भी किया जा सकता है। नवरात्रि में यह जप प्रतिदिन करें।

विशेष: यदि 108 नाम एक बार में याद न हों तो इस लेख को सामने रखकर पढ़ते हुए भी जप किया जा सकता है। माँ के लिए भाव और श्रद्धा ज़रूरी है, रटी हुई माला नहीं। जब मन से पढ़ेंगे तो धीरे-धीरे सभी नाम कंठस्थ हो जाएंगे।

नवरात्रि में दुर्गा माँ के 108 नामों का विशेष महत्व

नवरात्रि वर्ष में दो बार आती है – चैत्र नवरात्रि (मार्च-अप्रैल) और शारदीय नवरात्रि (अक्टूबर). इन नौ दिनों में माँ दुर्गा अपनी सभी शक्तियों के साथ पृथ्वी पर विशेष रूप से उपस्थित मानी जाती हैं। इस समय किया गया जप, पाठ और पूजन सामान्य दिनों से कई गुना अधिक फलदायी होता है।

नवरात्रि के नौ दिनों में माँ के नौ स्वरूपों की पूजा होती है – शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक। इन सभी स्वरूपों के नाम 108 नामों की अष्टोत्तरशतनामावली में समाहित हैं। इसलिए नवरात्रि में प्रतिदिन यह 108 नाम जपने से भक्त माँ के सभी नौ रूपों का आशीर्वाद एक साथ पाते हैं।

नवरात्रि की अष्टमी (आठवें दिन) और नवमी (नवें दिन) को विशेष रूप से इस पाठ का महत्व है। अष्टमी को माँ महागौरी और नवमी को माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है। इन दोनों दिनों में दुर्गा अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ करके कन्या पूजन करने से अत्यंत शुभ फल मिलते हैं।

यदि आप नवरात्रि में दुर्गा नाम जप की सम्पूर्ण विधि जानना चाहते हैं, या नव दुर्गा के क्रमिक जप की पद्धति समझना चाहते हैं, तो इन लेखों में पूरी जानकारी मिलेगी। नवरात्रि में दुर्गा चालीसा का पाठ भी इन 108 नामों के साथ करने से पूजा और भी सम्पूर्ण हो जाती है।

108 नाम जप का फल

देवी भागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण में माँ दुर्गा के 108 नामों के जप का फल इस प्रकार बताया गया है। जो भक्त नियमित रूप से इस अष्टोत्तर का पाठ करते हैं, उन्हें – शत्रुओं से विजय मिलती है, भय और चिंता दूर होती है, धन-सम्पदा और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है, और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। माँ दुर्गा अपने 108 नामों में से जिस भी नाम के माध्यम से पुकारी जाएं, वे भक्त की सुनती हैं और उसकी रक्षा करती हैं।

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दुर्गा माँ के 108 नाम कौन से हैं?

दुर्गा माँ के 108 नामों को अष्टोत्तरशतनामावली कहते हैं। इनमें दुर्गा, काली, भद्रकाली, अम्बिका, जया, विजया, चण्डिका, चामुंडा जैसे शक्तिशाली नाम शामिल हैं।

दुर्गा के 108 नाम कब जपने चाहिए?

दुर्गा माँ के 108 नामों का जप नवरात्रि में विशेष फलदायी होता है। इसके अलावा शुक्रवार, अष्टमी और नवमी तिथि को भी ये नाम जपे जाते हैं।

दुर्गा अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?

अष्टोत्तर = 108। शतनामावली = सौ नामों की माला। इस पाठ में माँ दुर्गा के 108 नामों की स्तुति की जाती है। यह पूजा का एक महत्वपूर्ण अंग है।

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