ॐ जय शिव ओंकारा: शिव आरती अर्थ सहित
“ॐ जय शिव ओंकारा” भारत की सबसे प्रिय और सर्वाधिक गाई जाने वाली शिव आरतियों में से एक है – श्री शिवानंद स्वामी जी द्वारा रचित यह आरती शिव के त्रिगुण स्वरूप की उपासना है। यहाँ संपूर्ण 8 पद और उनके हिंदी अर्थ दिए गए हैं ताकि भक्त शब्दों के भाव को समझते हुए आरती कर सकें।
ॐ जय शिव ओंकारा – संपूर्ण आरती अर्थ सहित
यह एक परंपरागत सार्वजनिक डोमेन आरती है, उत्तर भारत में मंदिरों और घरों में व्यापक रूप से प्रचलित।
पद 1
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अर्थ: हे ॐ-स्वरूप शिव की जय! आपमें ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव – तीनों समाहित हैं। अर्द्धांगिनी (पार्वती) सदा आपके साथ विराजती हैं।
पद 2
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अर्थ: एक मुख (शिव), चार मुख (ब्रह्मा) और पाँच मुख (पंचानन-शिव) – सभी रूपों में राजित हैं। हंस पर ब्रह्मा, गरुड़ पर विष्णु और नंदी बैल पर शिव सुशोभित हैं।
पद 3
दो भुज चार चतुर्भुज, दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अर्थ: दो भुज (शिव), चार भुज (विष्णु) और दस भुज (दुर्गा/शक्ति) – सभी में अति सोहते हैं। तीनों गुणों के स्वरूप को देखकर तीनों लोकों के जन मोहित हो जाते हैं।
पद 4
अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी, करमाला धारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अर्थ: रुद्राक्ष-माला, वन-पुष्पों की माला और मुंडमाला धारण करने वाले; त्रिपुर के नाशक शिव, कंस के नाशक कृष्ण और करकमलों में माला धारण किए ब्रह्मा – तीनों की जय।
पद 5
श्वेताम्बर पीताम्बर, बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक, भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अर्थ: श्वेत वस्त्र (ब्रह्मा), पीत वस्त्र (विष्णु) और व्याघ्रचर्म (शिव) – सब धारण किए हैं। सनकादि ऋषि, गरुड़ आदि देव और भूतगण इनके संग विराजते हैं।
पद 6
कर के मध्य कमण्डलु, चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुःखहारी, जगपालनकारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अर्थ: हाथ में कमण्डलु (ब्रह्मा), सुदर्शन चक्र (विष्णु) और त्रिशूल (शिव) धारण किए हैं। सुख देने वाले, दुःख हरने वाले और जगत के पालनकर्ता हैं।
पद 7
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर में शोभित, ये तीनों एका॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अर्थ: अविवेकी (अज्ञानी) लोग ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव को अलग-अलग मानते हैं; किंतु प्रणव (ॐ) में ये तीनों एकरूप हैं – यही त्रिमूर्ति का रहस्य है।
पद 8
त्रिगुण शिव जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अर्थ: शिवानंद स्वामी जी कहते हैं – जो कोई इस त्रिगुण शिव की आरती गाता है, उसे मनवांछित फल प्राप्त होता है।
इस आरती में छुपा दार्शनिक रहस्य
यह आरती केवल स्तुति नहीं है – इसमें हिंदू दर्शन का एक गहरा सिद्धांत समाया है। पद 7 इस आरती की आत्मा है: “ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका। प्रणवाक्षर में शोभित, ये तीनों एका।”
अर्थात् सृजन (ब्रह्मा), पालन (विष्णु) और संहार (शिव) – ये तीन अलग-अलग शक्तियाँ नहीं बल्कि एक ही परम सत्ता के तीन आयाम हैं, जो ॐ में एकाकार हो जाते हैं। यही कारण है कि इस आरती का आरंभ ही “ॐ जय शिव ओंकारा” से होता है – “ओंकार” = वह परम तत्व जिसमें सब समाते हैं।
पद 1 से 6 तक त्रिदेव के विभिन्न रूप, वाहन, आयुध और आभूषण गिनाए गए हैं – हर पद में तीनों की एकता का संकेत है। यह संरचना जानबूझकर है: भक्त को धीरे-धीरे इस समझ तक ले जाना कि जिसे भी भजो, वह एक ही है।
सोमवार और सावन में शिव आरती की विधि
शिव आरती की विधि सरल है लेकिन भाव-सहित होनी चाहिए:
- समय: प्रातःकाल अभिषेक के बाद या संध्या-पूजन में। सोमवार और सावन में विशेष रूप से करें।
- दीप: घी का दीपक सबसे उत्तम। परिवार के साथ मिलकर गाएं – “जो कोई नर गावे” में “कोई” शब्द विशेष है, कोई भी पात्र है।
- टेक का बारंबार उच्चारण: प्रत्येक पद के बाद “ॐ जय शिव ओंकारा” दोहराएं – यह टेक ही नाम-जप है।
- अर्थ सहित: जब आरती के शब्दों का अर्थ पता हो तो भाव गहरा होता है। आज से शब्दों के साथ अर्थ भी मन में रखें।
- Devta App से जोड़ें: Devta App पर शिव के दैनिक दर्शन करें और “ॐ नमः शिवाय” के जप काउंटर से सावन की साधना पूरी करें – माला न हो तो भी जप की गिनती सुरक्षित रहती है।
जो लोग अक्सर गलत करते हैं
एक सामान्य भ्रांति यह है कि आरती “गाना नहीं जानते” तो नहीं कर सकते। आरती गाने की योग्यता “मनवांछित फल पाने” की शर्त नहीं है – शर्त भाव की है। “जो कोई नर गावे” – बस कोई भी, किसी भी सुर में।
दूसरी भ्रांति: आरती केवल मंदिर में होती है। घर में शिव की फोटो या शिवलिंग के सामने दीपक जलाकर यह आरती करना उतना ही फलदायक है। “त्रिभुवन जन मोहे” – तीनों लोकों के जन इसमें शामिल हैं, आप भी।
इस आरती के साथ ॐ नमः शिवाय जप और शिव तांडव स्तोत्र – इन तीनों को अपनी सोमवार की साधना में शामिल करें। Devta App पर शिव जप की पूरी विधि जानें।
ॐ जय शिव ओंकारा आरती कब गाएं?
सोमवार, शिवरात्रि और सावन मास में यह आरती विशेष फलदायक मानी जाती है। प्रातःकाल और संध्या पूजा दोनों में गाई जा सकती है।
शिव आरती में कितने पद हैं?
मुख्य संस्करण में 8 पद (छंद) हैं, जिसमें प्रत्येक पद के बाद ‘ॐ जय शिव ओंकारा’ का टेक दोहराया जाता है। कुछ विस्तृत संस्करणों में 12-13 पद मिलते हैं।
इस आरती के रचनाकार कौन हैं?
ॐ जय शिव ओंकारा आरती के रचनाकार श्री शिवानंद स्वामी माने जाते हैं। यह परंपरागत रूप से उत्तर भारत में सर्वाधिक गाई जाने वाली शिव आरती है।
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