कौन सी स्तुति एक ही साँस में राम के सौंदर्य, करुणा, वीरता और अपनी भक्ति-विनती सब समेट ले? उत्तर है – रामचंद्र कृपालु भजमन। गोस्वामी तुलसीदास ने इसे विनय पत्रिका (श्लोक 45) में हरिगीतिका छंद में रचा था – और चार सौ से अधिक वर्षों बाद भी यह स्तुति उतनी ही ताज़ी और प्रभावशाली है।…