राम का नाम अमोघ है – यह सबको पता है। पर जब “सीताराम” कहते हैं, तो उसमें कुछ और मिलता है – जैसे पूर्णता का बोध। अकेला राम नाम पूर्ण है, फिर भी जब सीता उसके आगे आती हैं, तो वह नाम युगल हो जाता है। शक्ति और शिव, प्रकृति और पुरुष, करुणा और धर्म…
सावन शुरू हो चुका है। संकल्प लिया – सवा लाख ॐ नमः शिवाय जप का। लेकिन अगले ही दिन सवाल खड़ा हो गया: रोज़ कितना जपना होगा? कितनी मालाएं? और अगर एक दिन चूक गए – तो क्या पूरा संकल्प टूट जाएगा? यह सवाल हर उस भक्त के मन में आता है जो पहली बार…
हनुमान भक्ति शायद अकेली ऐसी भक्ति है जिसमें गिनती परंपरा के केंद्र में बैठी है। तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा में स्वयं सौ पाठ की महिमा गाई है – जो नियम से सौ बार पाठ करता है, उसके संकट छूट जाते हैं। इसीलिए हनुमान भक्त संख्या के व्रत लेते आए हैं: सौ चालीसा पाठ, ग्यारह…
सावन आते ही शिव भक्तों के मन में एक ही संकल्प उठता है – इस बार महादेव के नाम का बड़ा जप होगा। कोई रोज़ एक माला ॐ नमः शिवाय का नियम लेता है, कोई पूरे महीने का, और कई भक्त परंपरा का सबसे प्रसिद्ध व्रत उठाते हैं – सवा लाख जप। सवा लाख यानी…
हरे कृष्ण भक्ति परंपरा में एक नियम पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है – रोज़ 16 माला। यानी 16 x 108 = 1,728 बार हरे कृष्ण महामंत्र। दुनिया भर के लाखों भक्त दशकों से यह नियम निभा रहे हैं। और इस नियम की नींव में एक बहुत सीधी सी बात छिपी है, जो हर कृष्ण भक्त…
तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में एक अद्भुत बात लिखी – भगवान राम ने तो एक अहल्या को तारा, पर राम के नाम ने करोड़ों बिगड़ी बुद्धियों को सुधार दिया। शायद इसीलिए राम भक्त गिनती में भी छोटा संकल्प नहीं लेते। कोई सवा लाख राम नाम का संकल्प लेता है, कोई राम नाम लेखन की पोथी…
राधा रानी का नाम जपना शुरू किया – रोज़ एक लाख नाम का संकल्प। माला उठाई, 108 जप पूरे हुए, अगली माला शुरू की। लेकिन तीसरी माला तक पहुँचते-पहुँचते सवाल उठा: अब तक कितनी मालाएं हो गई? एक लाख तक पहुँचने के लिए तो 926 से ज़्यादा मालाएं चाहिए – इतनी गिनती कौन याद रखे?…
शाम ढलते ही वृंदावन के हर मंदिर में एक ही धुन गूंजने लगती है – “आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की।” यह श्री कृष्ण की सबसे प्रिय और सबसे ज्यादा गाई जाने वाली आरती है, फिर भी बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी हर पंक्ति में क्या छिपा है। नीचे इस आरती का…
बिना माला के नाम जप का सबसे सरल और शास्त्र-सम्मत तरीका मानसिक जप है, यानी मन ही मन नाम का स्मरण, जिसमें माला की ज़रूरत ही नहीं। गिनती रखनी हो तो उँगलियों के पोरों पर गिनें, सुमिरनी या मोबाइल जप काउंटर का उपयोग करें, या रोज़ का समय तय कर लें। स्वामी शिवानंद मानसिक जप…