अमांत श्रावण - amanta-shravan-maas-2026-maharashtra-gujarat-date

श्रावण मास (अमांत): महाराष्ट्र-गुजरात-दक्षिण में सावन कब से – पूरी जानकारी

अगस्त का पहला हफ़्ता था। पुणे में रहने वाली एक महिला का दिल्ली की बहन से फ़ोन पर झगड़ा हो गया – “तुमने सावन का व्रत शुरू क्यों नहीं किया? जुलाई के आखिर से ही सावन शुरू हो गया था!” पुणे वाली बहन हैरान – उसके पंडित जी ने तो 13 अगस्त से श्रावण बताया था। दोनों गलत नहीं थीं। दोनों एक ही भगवान शिव को मानती थीं। बस उनके घर में दो अलग-अलग हिंदू पंचांग चलते थे।

यह भ्रम हर साल लाखों परिवारों में होता है – ख़ासकर उन घरों में जहां उत्तर भारतीय और महाराष्ट्रीयन, गुजराती या दक्षिण भारतीय रिश्तेदार हैं। असल में हिंदू पंचांग में दो प्रमुख कैलेंडर परंपराएं हैं और श्रावण महीने की तिथि इन दोनों में करीब 15 दिन अलग होती है।

पूर्णिमान्त और अमांत – एक भगवान, दो कैलेंडर

हिंदू कैलेंडर में महीने की गणना दो तरीकों से होती है।

पूर्णिमान्त कैलेंडर में महीना पूर्णिमा की रात को समाप्त होता है। यह परंपरा उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में प्रचलित है। इसमें श्रावण मास 2026 में 30 जुलाई से 28 अगस्त तक चलता है।

अमांत कैलेंडर में महीना अमावस्या (नई चांद की रात) को समाप्त होता है। यह परंपरा महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में चलती है। इसमें श्रावण मास 2026 में 13 अगस्त से 11 सितंबर तक है।

दोनों परंपराएं वैध हैं, दोनों वैदिक ज्योतिष पर आधारित हैं। तिथि का अंतर है – शिव का नाम एक ही है।

अमांत श्रावण मास 2026: महाराष्ट्र-गुजरात-दक्षिण भारत की तिथियां

अमांत कैलेंडर मानने वाले क्षेत्रों के लिए श्रावण मास 2026 की प्रमुख तिथियां:

  • श्रावण मास आरंभ: गुरुवार, 13 अगस्त 2026
  • श्रावण मास समाप्ति: शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 (अमावस्या)
  • कुल अवधि: 30 दिन
  • क्षेत्र: महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु

अमांत श्रावण के सावन सोमवार 2026

अमांत श्रावण 2026 में चार सावन सोमवार पड़ते हैं:

  • पहला सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026
  • दूसरा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026
  • तीसरा सावन सोमवार: 31 अगस्त 2026
  • चौथा सावन सोमवार: 7 सितंबर 2026

ये चारों सोमवार व्रत, जप, रुद्राभिषेक और शिव मंदिर दर्शन के लिए विशेष हैं। पूर्णिमान्त क्षेत्र के भक्तों से सात दिन देर से श्रावण शुरू होता है – लेकिन यह कमज़ोरी नहीं, यह एक और अवसर है। 11 सितंबर तक पूरे 30 दिन का जप-संकल्प पूरा करने का।

पूजा विधि में कोई फ़र्क़ नहीं – बस तिथि अलग है

एक सवाल जो अक्सर आता है – “क्या अमांत में शिव पूजा विधि अलग होती है?” उत्तर सरल है: नहीं। ओम नमः शिवाय का पंचाक्षर मंत्र एक ही है। रुद्राभिषेक की विधि एक ही है। बेलपत्र अर्पण, जलाभिषेक, सोमवार व्रत – सब एक ही हैं। केवल कैलेंडर की तिथि बदलती है, शिव-भक्ति का स्वरूप नहीं।

स्वामी शिवानंद (Divine Life Society) के अनुसार जप किसी भी समय, किसी भी परिस्थिति में हो सकता है – कोई पवित्रता की बाधा नहीं है मानसिक जप में। इसलिए श्रावण मास में – चाहे पूर्णिमान्त हो या अमांत – मन में “ओम नमः शिवाय” का जप निरंतर चल सकता है।

अमांत श्रावण में सवा लाख जप का संकल्प: 30 दिन की साधना

श्रावण मास के 30 दिन एक लंबा और भव्य अवसर हैं। यदि आप सवा लाख जप का संकल्प लेना चाहते हैं – जो इस माह की सबसे प्रचलित साधनाओं में से एक है – तो रोज़ाना का लक्ष्य इस तरह बनता है:

  • सवा लाख (1,25,000) ÷ 30 दिन = लगभग 4,167 जप प्रतिदिन
  • एक माला में 108 जप होते हैं – इसका मतलब प्रतिदिन करीब 38-39 माला
  • यदि हर माला में 5 मिनट लगें – तो रोज़ करीब 3-3.5 घंटे
  • इसे सुबह, दोपहर और संध्या में बांट सकते हैं

माला से जप करना हो तो रुद्राक्ष या तुलसी की माला शिव जप के लिए परंपरागत मानी जाती है। लेकिन अगर माला संभव न हो – दफ़्तर में हों, यात्रा में हों, या हाथ व्यस्त हों – तो मानसिक जप या डिजिटल काउंटर से गिनती जारी रख सकते हैं। सवा लाख जप संकल्प की पूरी रोज़ाना गणना और विधि इस लेख में विस्तार से मिलेगी।

Devta App में इस तरह के बड़े संकल्प को ट्रैक करना बहुत आसान है – हर दिन का जप आपके account में save होता है, फोन बदलने पर भी count ज़ाया नहीं होता। 30 दिन के अंत में आप देख सकते हैं कि पूरे श्रावण में कितने नाम लिए।

श्रावण सोमवार की दिनचर्या: घर बैठे पूरी साधना

अमांत श्रावण के प्रत्येक सोमवार की एक सरल संरचना यह हो सकती है:

  • प्रातः (सूर्योदय से पहले): ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान, “ओम नमः शिवाय” का संकल्प, पहली माला
  • सुबह: शिव को जलाभिषेक या रुद्राभिषेक (घर में या मंदिर में), बेलपत्र अर्पण, जप जारी
  • दिनभर: मानसिक जप – काम करते, यात्रा करते, किसी भी परिस्थिति में
  • संध्या: दीप जलाएं, आरती, उस दिन का जप count पूरा करें
  • रात्रि: “ओम नमः शिवाय” के साथ नींद की ओर – मानसिक जप

सावन सोमवार की पूरी दिनभर की विधि के लिए इस लेख में विस्तृत मार्गदर्शन है।

एक आम गलती जो बहुत लोग करते हैं

अमांत क्षेत्र के कई भक्त यह सोचकर निराश हो जाते हैं कि “हमारा सावन देर से आया, इसलिए हम पीछे रह गए।” यह सोच ग़लत है। श्रावण का उद्देश्य एक मास तक शिव का ध्यान और जप करना है – और यह उद्देश्य 13 अगस्त से 11 सितंबर के बीच उतना ही पूरा होता है जितना 30 जुलाई से 28 अगस्त के बीच।

कुछ मायनों में अमांत श्रावण का एक अलग फ़ायदा है – त्योहार की भीड़ थोड़ी कम होती है, मंदिर थोड़े शांत मिलते हैं, और जप के लिए अनुकूल वातावरण बनता है।

श्रावण कोई दौड़ नहीं है जो पहले शुरू करने वाला जीते। यह एक प्रेम है – और प्रेम का रस तिथि नहीं, भावना तय करती है।

ओम नमः शिवाय जप की पूरी रुद्राक्ष माला विधि के बारे में यहाँ पढ़ें।

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अमांत श्रावण मास 2026 कब से कब तक है?

अमांत कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास 2026 में 13 अगस्त (गुरुवार) से शुरू होकर 11 सितंबर (शुक्रवार) तक रहता है। यह महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में माना जाता है।

अमांत और पूर्णिमान्त कैलेंडर में क्या फ़र्क़ है?

पूर्णिमान्त कैलेंडर (उत्तर भारत) में महीना पूर्णिमा को समाप्त होता है; अमांत कैलेंडर (महाराष्ट्र, गुजरात, दक्षिण भारत) में महीना अमावस्या को समाप्त होता है। इसलिए दोनों में श्रावण की तिथि में लगभग 15 दिन का अंतर आता है।

अमांत श्रावण के सोमवार 2026 में कब-कब हैं?

अमांत श्रावण 2026 के सावन सोमवार: 17 अगस्त, 24 अगस्त, 31 अगस्त और 7 सितंबर। ये चारों सोमवार महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के लिए विशेष महत्व के हैं।

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