खाटू श्याम चालीसा: संपूर्ण पाठ अर्थ सहित
हारे का सहारा, खाटू वाले श्याम” – यही वह पहचान है जिससे लाखों भक्त बाबा श्याम को पुकारते हैं। खाटू श्याम चालीसा इसी भाव से रची गई पारंपरिक भक्ति रचना है, जो बर्बरीक के दिव्य अवतार, उनकी महिमा और शरणागत भक्तों पर उनकी कृपा का वर्णन करती है। नीचे संपूर्ण पाठ हर चौपाई के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है, ताकि आप जो पढ़ें उसे समझ भी सकें।
यह चालीसा सदियों से मौखिक और लिखित परंपरा में भक्तों के बीच प्रचलित है, इसलिए यह सार्वजनिक भक्ति साहित्य का हिस्सा मानी जाती है। नीचे दिया गया पाठ व्यापक रूप से प्रचलित संस्करण पर आधारित है।
खाटू श्याम चालीसा दोहा
श्री गुरु चरणन ध्यान धर, सुमीर सच्चिदानंद।
श्याम चालीसा भजत हूँ, रच चौपाई छंद॥
अर्थ: श्री गुरु के चरणों का ध्यान धरकर और सच्चिदानंद स्वरूप परमात्मा का स्मरण करके, यह श्याम चालीसा चौपाई छंद में रचकर भजी जा रही है – इसी विनम्र प्रार्थना से पाठ आरंभ होता है।
संपूर्ण चालीसा अर्थ सहित
1. श्याम-श्याम भजि बारंबारा। सहज ही हो भवसागर पारा॥
2. इन सम देव न दूजा कोई। दिन दयालु न दाता होई॥
3. भीम सुपुत्र अहिलावाती जाया। कही भीम का पौत्र कहलाया॥
4. यह सब कथा कही कल्पांतर। तनिक न मानो इसमें अंतर॥
अर्थ (1-4): बार-बार श्याम-श्याम भजने से सहज ही भवसागर पार हो जाता है। इनके समान कोई दूसरा देवता नहीं, न कोई इतना दीनदयालु दाता है। ये भीम के पुत्र घटोत्कच और नागकन्या अहिलावती के पुत्र बर्बरीक कहलाए, इसीलिए भीम के पौत्र (नाती) कहे जाते हैं। यह कथा युगों-युगों से कही जाती रही है, इसमें तनिक भी संदेह मत मानिए।
5. बर्बरीक विष्णु अवतारा। भक्तन हेतु मनुज तन धारा॥
6. बासुदेव देवकी प्यारे। जसुमति मैया नंद दुलारे॥
7. मधुसूदन गोपाल मुरारी। ब्रजकिशोर गोवर्धन धारी॥
8. सियाराम श्रीहरि गोबिंदा। दीनपाल श्रीबाल मुकुंदा॥
अर्थ (5-8): बर्बरीक स्वयं भगवान विष्णु के अवतार हैं, जिन्होंने भक्तों के कल्याण के लिए मनुष्य रूप धारण किया। वे ही वासुदेव-देवकी के प्यारे पुत्र और यशोदा मैया-नंद के दुलारे कृष्ण भी हैं। मधुसूदन, गोपाल, मुरारी, ब्रज के किशोर, गोवर्धनधारी – ये सब उन्हीं के नाम हैं। सियाराम, श्रीहरि, गोविंद, दीनों के रक्षक, बाल मुकुंद – सब रूप उसी एक परब्रह्म के हैं।
9. दामोदर रणछोड़ बिहारी। नाथ द्वारिकाधीश खरारी॥
10. राधाबल्लभ रुक्मणि कंता। गोपी बल्लभ कंस हनंता॥
11. मनमोहन चित चोर कहाये। माखन चोरी-चारी कर खाये॥
12. मुरलीधर यदुपति घनश्याम। कृष्ण पतित पावन अभिराम॥
अर्थ (9-12): दामोदर, रणछोड़ बिहारी, द्वारिकाधीश नाथ, खर दैत्य के संहारक – ये सब उन्हीं की महिमा बताते हैं। राधा के प्रिय, रुक्मणी के पति, गोपियों के वल्लभ और कंस का वध करने वाले – यही श्याम हैं। मन को मोहने और चित्त चुराने के कारण वे मनमोहन और चित्तचोर कहलाए, माखन चुराकर खाने की उनकी बाल-लीला प्रसिद्ध है। मुरलीधर, यदुवंश के स्वामी, घनश्याम वर्ण के, पतितों को पावन करने वाला उनका सुंदर स्वरूप सबका मन मोह लेता है।
13. मायापति लक्ष्मीपति ईशा। पुरुषोत्तम केशव जगदीशा॥
14. विश्वपति जय भुवन पसारा। दीनबंधु भक्तन रखवारा॥
15. प्रभु का भेद न कोई पाया। शेष महेश थके मुनिराया॥
16. नारद शारद ऋषि योगींद्रा। श्याम-श्याम सब रटत निरंतर॥
अर्थ (13-16): वे माया के स्वामी, लक्ष्मीपति, पुरुषोत्तम, केशव और समस्त जगत के ईश्वर हैं। सारे विश्व और भुवन के स्वामी, दीनबंधु और भक्तों के रखवाले भी वे ही हैं। प्रभु का असली भेद आज तक कोई नहीं पा सका – शेषनाग और भगवान शिव जैसे महान भी इस रहस्य को जानने में थक गए। नारद, शारदा और बड़े-बड़े ऋषि-मुनि, योगीजन – सब निरंतर “श्याम-श्याम” ही रटते रहते हैं।
17. कवि कोटि करि कानन गिनंता। नाम अपार अथाह अनंता॥
18. हर सृष्टि हर सुग में भाई। ये अवतार भक्त सुखदाई॥
19. हृदय माहि करि देखु विचारा। श्याम भजे तो हो निस्तारा॥
20. कौर पढ़ावत गणिका तारी। भीलनी की भक्ति बलिहारी॥
अर्थ (17-20): करोड़ों कवि मिलकर भी गिनने बैठें तो भी इनके नाम अपार, अथाह और अनंत हैं, गिने नहीं जा सकते। हर सृष्टि, हर युग में यह अवतार भक्तों को सुख देने वाला रहा है। अपने हृदय में विचार करके देख लीजिए – श्याम को भजने से ही सच्चा उद्धार (निस्तार) होता है। जिस गणिका को एक कौर खिलाने भर से तार दिया, शबरी जैसी भीलनी की सच्ची भक्ति भी उतनी ही बलिहारी गई।
21. सती अहिल्या गौतम नारी। भई श्रापवश शिला दुलारी॥
22. श्याम चरण रज चित लाई। पहुंची पति लोक में जाही॥
23. अजामिल अरु सदन कसाई। नाम प्रताप परम गति पाई॥
24. जाके श्याम नाम अधारा। सुख लहहि दुःख दूर हो सारा॥
अर्थ (21-24): गौतम ऋषि की पत्नी सती अहिल्या शाप के कारण पत्थर बन गई थीं। श्याम-चरणों की धूल को हृदय में धारण करते ही वे पुनः पति-लोक को प्राप्त हुईं। अजामिल जैसे पापी और सदना कसाई जैसे लोग भी केवल नाम के प्रताप से परम गति को पा गए। जिसके जीवन का सहारा श्याम-नाम है, उसे सुख मिलता है और सारा दुःख दूर हो जाता है।
25. श्याम सलोवन है अति सुंदर। मोर मुकुट सिर तन पीतांबर॥
26. गले बैजंती माल सुहाई। छवि अनूप भक्तन मान भाई॥
27. श्याम-श्याम सुमिरहु दिन-राती। श्याम दुपहरि कर परभाती॥
28. श्याम सारथी जिस रथ के। रोड़े दूर होए उस पथ के॥
अर्थ (25-28): श्याम सांवले किन्तु अत्यंत सुंदर हैं – सिर पर मोर मुकुट और तन पर पीतांबर सुशोभित है। गले में बैजंती माला शोभा दे रही है, उनकी अनुपम छवि सभी भक्तों के मन को भा जाती है। दिन-रात, दोपहर और सुबह हर पहर श्याम-श्याम का ही सुमिरन कीजिए। जिस रथ के सारथी स्वयं श्याम बन जाएँ, उस पथ की हर बाधा अपने आप दूर हो जाती है।
29. श्याम भक्त न कही पर हारा। भीर परि तब श्याम पुकारा॥
30. रसना श्याम नाम रस पी ले। जी ले श्याम नाम के ही ले॥
31. संसारी सुख भोग मिलेगा। अंत श्याम सुख योग मिलेगा॥
32. श्याम प्रभु हैं तन के काले। मन के गोरे भोले-भाले॥
अर्थ (29-32): श्याम का भक्त कभी कहीं हारता नहीं – जब भी संकट (भीर) आन पड़े, बस श्याम को पुकार लीजिए। हे जीभ, श्याम-नाम का रस पी ले, श्याम-नाम के सहारे ही जीवन जी ले। इससे सांसारिक सुख-भोग भी मिलेगा और अंत में श्याम की कृपा का परम सुख-योग भी प्राप्त होगा। श्याम प्रभु भले ही तन के रंग से सांवले हैं, पर मन से एकदम गोरे, भोले और सरल हैं।
33. श्याम संत भक्तन हितकारी। रोग-दोष अघ नाशे भारी॥
34. प्रेम सहित जब नाम पुकारा। भक्त लगत श्याम को प्यारा॥
35. खाटू में हैं मथुरावासी। पराब्रह्म पूर्ण अविनाशी॥
36. सुधा तन भरी मुरली बजाई। चहुँ दिशि जहाँ सुनी पाई॥
अर्थ (33-36): श्याम संतों और भक्तों का हित करने वाले हैं, बड़े से बड़े रोग-दोष और पाप (अघ) को नष्ट कर देते हैं। जब भक्त प्रेम-सहित उनका नाम पुकारता है, तो वह भक्त श्याम को अत्यंत प्रिय लगने लगता है। मथुरा में निवास करने वाले वे ही अब खाटू धाम में विराजमान हैं, वे पूर्ण और अविनाशी परब्रह्म हैं। उन्होंने अमृत जैसी मधुर मुरली बजाई, जिसकी ध्वनि चारों दिशाओं में सुनाई दी।
37. वृद्ध-बाल जेते नारी नर। मुग्ध भये सुनी बंसी स्वर॥
38. हड़बड़ कर सब पहुँचे जाई। खाटू में जहाँ श्याम कन्हाई॥
39. जिसने श्याम स्वरूप निहारा। भव भय से पाया छुटकारा॥
अर्थ (37-39): बूढ़े-बच्चे, स्त्री-पुरुष सभी उस बंसी का स्वर सुनकर मुग्ध हो गए। सब हड़बड़ाकर उस ओर दौड़ पड़े, जहाँ खाटू में श्याम कन्हैया विराजमान थे। जिस किसी ने भी श्याम के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर लिए, उसे भव-भय अर्थात जन्म-मृत्यु के भय से छुटकारा मिल गया।
समापन दोहा
श्याम सलोने संवारे, बर्बरीक तनुधार।
इच्छा पूर्ण भक्त की, करो न लाओ बार॥
अर्थ: हे सलोने, सुसज्जित श्याम, बर्बरीक तन धारण करने वाले – अपने भक्त की इच्छा शीघ्र पूर्ण कीजिए, विलंब मत कीजिए। इसी प्रार्थना के साथ चालीसा पूर्ण होती है।
यह पाठ लोक-प्रचलित पारंपरिक संस्करण पर आधारित है, जो सदियों से मौखिक व मुद्रित रूप में खाटू श्याम भक्तों के बीच प्रवाहित है।
पाठ की विधि – एकादशी और श्याम बाबा के दिन का महत्व
परंपरागत रूप से सुबह स्नान के बाद स्वच्छ आसन पर बैठकर, दीपक जलाकर और श्याम बाबा की तस्वीर या मूर्ति के सामने उत्तर या पूर्व दिशा में मुख करके चालीसा का पाठ किया जाता है। एकादशी, द्वादशी और फाल्गुन मेले के दिनों को विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि इन्हीं दिनों देश-भर से भक्त खाटू धाम पहुँचते हैं। इसके अलावा सोमवार या किसी भी दिन श्रद्धा-भाव से पाठ किया जा सकता है, इसमें कोई कठोर बंधन नहीं है।
पाठ से पहले “श्याम-श्याम” या “जय श्री श्याम” का कुछ देर मानसिक जप करना और फिर चालीसा पढ़ना कई भक्तों की परंपरा है। कुछ भक्त चालीसा को दिन में एक बार, कुछ रोज़ सुबह-शाम दोनों समय पढ़ते हैं – यह पूरी तरह व्यक्तिगत श्रद्धा पर निर्भर है। अगर आप श्याम बाबा के नामों का जप भी साथ में करना चाहते हैं, तो उनकी कथा और नाम-जप विधि पर हमारे अन्य लेख भी पढ़ सकते हैं।
चालीसा पढ़ने के बाद अगर आप “श्याम-श्याम” या माला पर श्याम बाबा के नाम की गिनती भी रखना चाहें, तो भीड़-भाड़ या रोज़मर्रा की भागदौड़ में गिनती भूल जाना आम बात है। ऐसे में Devta App जैसा जप काउंटर काम आता है, जो हर जप अपने आप गिन लेता है और रोज़ श्याम बाबा के दर्शन भी घर बैठे करा देता है, ताकि आपका ध्यान गिनती में उलझने की बजाय “हारे का सहारा” के नाम में ही लगा रहे।
चालीसा पाठ के लाभ
- संकट में सहारा: “हारे का सहारा” के भाव से श्रद्धापूर्वक पाठ करने पर भक्तों को मानसिक बल और साहस मिलता है, ऐसा परंपरागत रूप से माना जाता है।
- बर्बरीक की कथा का स्मरण: हर चौपाई में बर्बरीक अवतार की कोई न कोई महिमा है, इसलिए पाठ करते हुए आप उनकी पूरी गाथा का स्मरण कर लेते हैं।
- दैनिक भक्ति अभ्यास: रोज़ पाठ करने से एक सहज दिनचर्या बनती है, जिसे Devta App पर अपनी जप-गिनती और रोज़ दर्शन के साथ जोड़कर निरंतरता बनाए रखी जा सकती है।
- पारंपरिक फलश्रुति: समापन दोहे के अनुसार श्रद्धापूर्वक पाठ से भक्त की इच्छाएँ पूर्ण होती हैं – यह परंपरा का कथन है, इसे उसी श्रद्धा-भाव से देखें।
खाटू श्याम चालीसा में बर्बरीक के विष्णु-अवतार से लेकर उनकी करुणा और भक्त-वत्सलता तक की पूरी यात्रा समाई है – यही कारण है कि लाखों भक्त हर साल खाटू धाम की ओर खिंचे चले आते हैं और “हारे का सहारा, बाबा श्याम” कहकर उनका जयकारा लगाते हैं। जब आप इसे श्रद्धा से पढ़ें, तो हर चौपाई के पीछे की भावना को भी मन में जीवंत होने दें – जय श्री श्याम।
खाटू श्याम चालीसा में कुल कितनी चौपाई हैं?
प्रचलित परंपरा में इसे चालीसा कहा जाता है, और सबसे व्यापक रूप से मिलने वाले संस्करण में एक आरंभिक दोहा, लगभग 39 चौपाई और एक समापन दोहा है, जो बर्बरीक अवतार की महिमा का वर्णन करती हैं।
खाटू श्याम चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?
परंपरागत रूप से एकादशी, द्वादशी और फाल्गुन मेले के दिनों में इसका पाठ विशेष शुभ माना जाता है, साथ ही हर सोमवार या श्याम बाबा से जुड़े किसी भी दिन श्रद्धा से पाठ किया जा सकता है।
क्या खाटू श्याम चालीसा रोज़ पढ़ी जा सकती है?
हाँ, इसे रोज़ पढ़ने पर कोई मनाही नहीं है। कई भक्त इसे सुबह-शाम की दिनचर्या में शामिल कर श्याम नाम जप के साथ जोड़ लेते हैं, जिससे एक निरंतर भक्ति अभ्यास बन जाता है।
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