काशी में सुबह की शुरुआत अलार्म से नहीं होती। गंगा किनारे कोई एक स्वर उठता है – “हर हर महादेव!” – और देखते ही देखते पूरा घाट उसे दोहरा देता है। वहां यह नारा नहीं, अभिवादन है। लोग “नमस्ते” की जगह हर हर महादेव कहते हैं। लेकिन यहां एक सवाल है जो अधिकांश बोलने वाले…