सावन की भीगी सड़क पर केसरिया कपड़ों में नंगे पांव चलता एक कांवड़िया जब थकने लगता है, तो वह रुकता नहीं – बस पुकारता है, “बोल बम!” और आसपास के दस कंठ गूंज उठते हैं, “बम बम भोले!” कदम फिर उठ जाते हैं। यह दृश्य हर सावन में करोड़ों बार दोहराया जाता है, लेकिन शायद…