कभी आपने यह महसूस किया है – कथा सुन रहे हैं, लेकिन मन कहीं और भटक रहा है? कथा का एक शब्द कान में जाता है, दूसरा निकल जाता है। सावन सोमवार का व्रत है, थाली सजी है, माहौल बना है – पर भीतर से कोई गहराई महसूस नहीं होती। यह एक बहुत आम अनुभव…
अगस्त का पहला हफ़्ता था। पुणे में रहने वाली एक महिला का दिल्ली की बहन से फ़ोन पर झगड़ा हो गया – “तुमने सावन का व्रत शुरू क्यों नहीं किया? जुलाई के आखिर से ही सावन शुरू हो गया था!” पुणे वाली बहन हैरान – उसके पंडित जी ने तो 13 अगस्त से श्रावण बताया…
ज़्यादातर लोग शाम की आरती करके सो जाते हैं और समझते हैं – शिवरात्रि हो गई। लेकिन जिन्होंने परंपरा को ध्यान से पढ़ा है, वे जानते हैं: असली शिवरात्रि तो रात ढलने के बाद शुरू होती है। “शिव-रात्रि” का अर्थ ही है – शिव की रात। पूरी रात, चार प्रहरों में, चार बार अभिषेक और…