गीता में कृष्ण ने खुद कहा: यज्ञों में मैं नाम-जप हूं
वैदिक काल में यज्ञ करना आसान काम नहीं था। अश्वमेध यज्ञ एक साल तक चलता था – सैकड़ों ऋत्विज, विशेष लकड़ियाँ, निर्धारित अनाज, हज़ारों मंत्रोच्चारण और हर पल की शुद्धता। राजसूय यज्ञ में राजाओं को अपनी विश्व-विजय सिद्ध करनी पड़ती थी। अग्निहोत्र, ज्योतिष्टोम, पुत्रकामेष्टि – हर यज्ञ के अपने सैकड़ों नियम थे। एक चूक और…