सावन शुरू हो चुका है। संकल्प लिया – सवा लाख ॐ नमः शिवाय जप का। लेकिन अगले ही दिन सवाल खड़ा हो गया: रोज़ कितना जपना होगा? कितनी मालाएं? और अगर एक दिन चूक गए – तो क्या पूरा संकल्प टूट जाएगा? यह सवाल हर उस भक्त के मन में आता है जो पहली बार…
घर में जो माला हाथ लगती है, अक्सर हम उसी पर जप शुरू कर देते हैं। किसी के गले में तुलसी की कंठी है, किसी के पास दादी की दी हुई तुलसी की माला है – और मन में “ॐ नमः शिवाय” चल रहा है। यहीं एक पुरानी बात रुक जाती है, जो बहुत कम…