30 जनवरी 1948 की शाम। बिड़ला भवन, नई दिल्ली। महात्मा गांधी प्रार्थना सभा की ओर जा रहे थे। तभी गोली चली। उनके मुख से अंतिम शब्द निकले – “हे राम।” बस इतना। दो शब्द। और उस एक पल में, इस देश के सबसे बड़े भक्त ने अपना पूरा जीवन, अपना पूरा भार, अपनी पूरी आत्मा…