शनिवार की सुबह। मंदिर के बाहर लंबी कतार है। काले तिल, तेल का दीपक, पीपल के पत्ते – हर हाथ में कुछ न कुछ है। पर भीड़ से अलग, एक बुजुर्ग महिला आँखें मूँदे धीरे-धीरे होठ हिला रही हैं। उनके शब्द कतार में नहीं, शनिदेव के पास सीधे पहुँच रहे हैं। वह पढ़ रही हैं…