विष्णु सहस्रनाम के हज़ार नाम रोज पढ़ने में आधा-पौना घंटा लगता है। संस्कृत कठिन लगे तो और ज्यादा। अब सोचिए – अगर कोई कहे कि इन हज़ार नामों का पूरा फल सिर्फ एक नाम में समाया है, और यह कहने वाला कोई साधारण व्यक्ति नहीं, स्वयं महादेव हों? यह दावा किसी प्रवचन की अतिशयोक्ति नहीं…