हर सुबह और हर शाम, लाखों राम मंदिरों में एक ही आवाज़ गूँजती है – “श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन…” यही है श्री राम आरती, जिसे गोस्वामी तुलसीदास जी ने विनय पत्रिका में रचा था। सात छंदों में तुलसीदास ने राम के सौंदर्य, करुणा, शक्ति और अपनी भक्ति-विनती को इस तरह पिरोया है कि यह आरती…