वृंदावन में एक अजीब बात होती है। जब कोई आपसे टकराए, जब मंदिर का पुजारी प्रसाद दे, जब बीच रात कोई भक्त जागे – एक ही शब्द सुनाई देता है: “श्री राधे।” न “नमस्ते”, न “राम राम”, सिर्फ “श्री राधे।” बाहर से देखने पर यह एक अभिवादन लगता है। लेकिन जो वृंदावन की रसिक परंपरा…