सुबह के सात बज रहे हैं। नहाना बाकी है, रसोई का काम है, और मन है कि भगवान का नाम ले ले। पर एक शंका रोकती है: “क्या अशुद्ध हूँ, तो जप होगा क्या? भगवान बुरा तो नहीं मानेंगे?” यह शंका करोड़ों भक्तों के मन में रोज़ आती है। और कभी-कभी इसी शंका में जप…
IV की नली हाथ में लगी है। कमरे में दवाइयों की गंध है। बाहर गलियारे में मशीनों की आवाज़ें आ रही हैं। और अंदर – बहुत अंदर – एक सवाल धीरे से उठता है: “क्या मैं यहाँ भगवान को याद कर सकता हूँ? क्या यह जगह उनके लायक है?” यह सवाल बहुत स्वाभाविक है। और…
घर में कोई बड़ा जन्मा हो या कोई अपना चला गया हो – सूतक की उस चुप्पी में एक सवाल अक्सर दिल में उठता है: क्या अभी भगवान का नाम ले सकते हैं? क्या मन ही मन प्रार्थना कर सकते हैं? कुछ लोग डरते हैं कि नाम लेना भी वर्जित है। कुछ मान बैठते हैं…