एक स्त्री मंदिर की देहरी पर रुक गई। भीतर शिवलिंग था, बिल्वपत्र और दीये की रोशनी में। उसके मन में बरसों से एक सवाल अटका था, जो उसने कभी ज़ोर से पूछने की हिम्मत नहीं की: क्या मैं इसे छू सकती हूँ? क्या मेरी भक्ति किसी नियम से रुकी हुई है? यह सवाल लाखों स्त्रियों…