कीर्तन में आपने यह धुन सैकड़ों बार सुनी होगी – “साम्ब सदाशिव साम्ब सदाशिव, जय जय शंकर…” लोग झूमते हैं, ताली बजाते हैं, आंखें भर आती हैं। लेकिन एक छोटी सी बात है जो अधिकांश गाने वाले भी नहीं जानते: इस नाम में शिव अकेले नहीं हैं। “साम्ब” शब्द के भीतर स्वयं माता पार्वती विराजती…