माला हाथ में है, मन में श्रद्धा है – पर ठीक जप शुरू करने से पहले एक झिझक आ जाती है: जपूँ क्या? सिर्फ “राम”? या “श्री राम”? या वो पूरी पंक्ति जो हर राम-धुन में सुनाई देती है – “श्री राम जय राम जय जय राम”? यह सवाल छोटा लगता है, पर इसी पर…
कल्पना कीजिए – काशी के एक प्राचीन घाट पर एक जीवन अपनी अंतिम साँसें ले रहा है। मान्यता कहती है कि उसी क्षण स्वयं महादेव, जो श्मशान और प्रलय के स्वामी हैं, झुककर उस मरते हुए प्राणी के कान में एक मंत्र फुसफुसाते हैं – और वही एक मंत्र उसे जन्म-मरण के अनंत चक्र से…
एक सवाल सोचिए: भगवान राम ने अपने पूरे जीवनकाल में कितने लोगों को सीधे तारा? ऋषि-पत्नी अहिल्या का उद्धार – यही सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है। लेकिन तुलसीदास रामचरितमानस में एक चौंकाने वाली तुलना करते हैं। राम एक तापस तिय तारी। नाम कोटि खल कुमति सुधारी॥ अर्थ: राम ने एक तपस्विनी (अहिल्या) का उद्धार किया –…
जप शुरू किया, माला उठाई, पहले तीन मनके घुमाए – और मन पहुँच गया कल की उस मीटिंग पर जो अधूरी रह गई थी। यह आपके साथ ही नहीं होता। अर्जुन ने भगवान कृष्ण से ठीक यही बात कही थी: मन बड़ा चंचल है, प्रमाथन करने वाला, बलवान और दृढ़ (भगवद गीता 6.34)। कृष्ण ने…
आज तक आपने नाम जपा है – पर कभी लिखा है? तुलसीदास के काल से चली आ रही एक परंपरा है जिसमें भक्त अपने जीवनकाल में लाखों, यहाँ तक कि करोड़ों बार “राम” लिखते हैं। इन नोटबुक्स को “राम नाम बही” कहते हैं, और वृंदावन में ऐसी हजारों बहियों का संग्रह आज भी सुरक्षित है।…