मथुरा के एक छोटे से कारागार की कोठरी में, आधी रात, बिना दीपक के – यहीं वह क्षण आया जब ब्रह्माण्ड थम गया। देवकी की आँखें चार दिशाओं में फैले दिव्य प्रकाश से भर गईं और उन्होंने अनुभव किया कि जो बालक जन्म ले रहा है, वह कोई साधारण शिशु नहीं। यही स्थान आज कृष्ण…