जन्माष्टमी की वह रात जब सारा घर कृष्णमय था – आरती, जप, कथा, भजन। लेकिन अगले दिन सुबह उठते ही रोज़ की भागदौड़ शुरू हो गई और वह भाव धीरे-धीरे हल्का पड़ने लगा। यही होता है हर बार। त्योहार की लौ तेज़ जलती है, फिर बुझने लगती है। लेकिन क्या होगा अगर इस बार वह…