पहली बार वृंदावन जाने वाला हर यात्री एक बात पर चौंकता है। वहाँ कोई “नमस्ते” नहीं कहता। सब्ज़ी बेचने वाला, रिक्शा वाला, मंदिर का पुजारी, गली में खेलता बच्चा – हर कोई मिलते ही दो शब्द बोलता है: “राधे राधे”। और वही उत्तर में लौटता है। पूरा शहर मानो एक ही नाम की धुन पर…