प्रायश्चित कैसे करें? शास्त्र और भक्ति दोनों का रास्ता
“प्रायश्चित” – यह शब्द सुनते ही मन में एक भारीपन आता है। जैसे किसी पुरानी गलती का कर्ज़ चुकाना हो, कोई कठोर दंड भुगतना हो। लेकिन जो प्रायश्चित का असली अर्थ है – वह बिल्कुल उल्टा है। “प्र + आयश्चित” – यानी प्रकृष्ट रूप से अयश (पाप) को चित (मन) से हटाना। भगवान की तरफ…