हर साल आषाढ़ एकादशी पर पाँच से दस लाख भक्त पैदल चलते हैं – पुणे से, सातारा से, सोलापुर से – सब एक ही मंज़िल की ओर: पंढरपुर। और रास्ते भर एक ही धुन गूंजती है: “विठ्ठल विठ्ठल, जय हरि विठ्ठल।” यह वारी, यह पदयात्रा, 800 साल से भी ज़्यादा पुरानी है। यह शायद भारत…