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गीता में कृष्ण ने खुद कहा: यज्ञों में मैं नाम-जप हूं
वैदिक काल में यज्ञ करना आसान काम नहीं था। अश्वमेध यज्ञ एक साल तक चलता था – सैकड़ों ऋत्विज, विशेष लकड़ियाँ, निर्धारित अनाज, हज़ारों मंत्रोच्चारण और हर पल की शुद्धता। राजसूय यज्ञ में राजाओं को अपनी विश्व-विजय सिद्ध करनी पड़ती थी। अग्निहोत्र, ज्योतिष्टोम, पुत्रकामेष्टि – हर यज्ञ के अपने सैकड़ों नियम थे। एक चूक और…
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कृष्ण के 108 नाम और उनके सुंदर अर्थ
कृष्ण के 108 नाम – जिन्हें श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली कहते हैं – यहाँ पूरे क्रम में, देवनागरी, transliteration और हिंदी अर्थ सहित दिए गए हैं। ये नाम भागवत, गीता और पुराणों में वर्णित कृष्ण के दिव्य गुणों, लीलाओं और स्वरूपों का सार हैं। नीचे एक ही जगह सम्पूर्ण, प्रामाणिक संग्रह है। प्रेमानंद महाराज जी…
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राधा रानी के पावन नाम – 28 और 108 नामावली अर्थ सहित
राधा रानी के नामों की परम्परा में दो मुख्य धाराएँ हैं – पहली: गर्ग संहिता और नारद पाञ्चरात्र से आए वे 28 पावन नाम जिन्हें प्रेमानंद महाराज जी ने करोड़ों भक्तों तक पहुँचाया; और दूसरी: ऊर्ध्वाम्नाय परम्परा की अष्टोत्तर शतनामावली जिसमें 108 नाम राधा रानी के विभिन्न रूपों, गुणों और लीलाओं को स्वर देते हैं।…