“नमामीशमीशान निर्वाणरूपं” – इन शब्दों से शुरू होने वाला रुद्राष्टकम भगवान शिव के आठ रूपों की सबसे प्राचीन और प्रिय स्तुतियों में से एक है। यह गोस्वामी तुलसीदास रचित है और रामचरितमानस के उत्तरकांड का हिस्सा माना जाता है। नीचे इसका संपूर्ण संस्कृत पाठ हर श्लोक के हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है, ताकि…