बहुत गलतियाँ हो गई हैं – भक्ति कहाँ से शुरू करूँ?
रात के अँधेरे में एक आवाज़ आती है – खुद के अंदर से। “इतना गलत किया है मैंने… भगवान क्या मुझे स्वीकार करेंगे? इतने सालों बाद अब उनके पास जाना क्या सही होगा?” यह सोच जितनी स्वाभाविक लगती है, उतनी ही खतरनाक है – क्योंकि यही सोच लाखों लोगों को भगवान से ठीक उस वक्त…