सुबह का वक्त है। घर में गेंदे के फूलों की हल्की खुशबू है। कहीं से छोटी-सी घंटी की आवाज़ आती है – और फिर एक नन्ही-सी चांदी की घुंघरू की झंकार। किसी ने अपने लड्डू गोपाल को उठाया है। कपड़े बदले हैं। माखन-मिश्री की छोटी कटोरी सामने रखी है। और बस, दिन शुरू हो गया…