सूरज उगने से पहले जब आकाश में नारंगी रंग फैलने लगता है – और फिर दोपहर जब सूरज ठीक शीर्ष पर होता है – और शाम जब रोशनी धीरे-धीरे विदा लेती है: ये तीनों क्षण हिंदू परंपरा में “संधि समय” कहलाते हैं। दिन और रात का संधि-स्थल। और गायत्री मंत्र इन्हीं तीनों संधियों का मंत्र…
अक्सर कहा जाता है – “जप कभी भी कर सकते हैं, समय कोई बाधा नहीं।” यह सच है – जप किसी भी समय किया जा सकता है और परंपरा उसका स्वागत करती है। पर सच का दूसरा हिस्सा यह है कि कुछ समय दूसरों से कहीं ज़्यादा शक्तिशाली होते हैं – और संत परंपरा ने…