राम का नाम अमोघ है – यह सबको पता है। पर जब “सीताराम” कहते हैं, तो उसमें कुछ और मिलता है – जैसे पूर्णता का बोध। अकेला राम नाम पूर्ण है, फिर भी जब सीता उसके आगे आती हैं, तो वह नाम युगल हो जाता है। शक्ति और शिव, प्रकृति और पुरुष, करुणा और धर्म…
हनुमान जी के बारे में एक कम-ज्ञात तथ्य यह है कि उनके तीन पिता हैं। और “केसरीनंदन” नाम उनमें से एक को – उनके पृथ्वी के पिता को – श्रद्धापूर्वक याद करता है। “पवनसुत” नाम आप जानते हैं – वायु देव के पुत्र। “अंजनीपुत्र” नाम भी जानते हैं – माँ अंजना के पुत्र। लेकिन “केसरीनंदन”…
जब तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा लिखी, तो उन्होंने हनुमान जी का पहला विस्तृत परिचय तीन शब्दों से दिया: “महावीर विक्रम बजरंगी।” और इन तीनों में सबसे पहले आया – “महावीर।” यह संयोग नहीं था। किसी भी परिचय में पहला शब्द सबसे महत्वपूर्ण होता है। तुलसीदास जी ने हनुमान जी को बजरंगबली नहीं, संकटमोचन नहीं…
माला जप करते लगभग हर उपासक ने यह देखा होगा – जब सुमेरु मनके के पास पहुँचते हैं, उँगलियाँ रुक जाती हैं, माला पलट जाती है, और जप आगे बढ़ता है। यह इतना स्वाभाविक है कि ज़्यादातर लोग इसे बिना सोचे करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी रुककर यह पूछा – यह नियम आया कहाँ…
अक्सर कहा जाता है – “जप कभी भी कर सकते हैं, समय कोई बाधा नहीं।” यह सच है – जप किसी भी समय किया जा सकता है और परंपरा उसका स्वागत करती है। पर सच का दूसरा हिस्सा यह है कि कुछ समय दूसरों से कहीं ज़्यादा शक्तिशाली होते हैं – और संत परंपरा ने…
जप शुरू करते ही पहला सवाल यही उठता है – माला लेनी चाहिए या नहीं? और अगर लेनी है, तो रुद्राक्ष, तुलसी या कोई और? बहुत लोग इसी असमंजस में जप शुरू ही नहीं कर पाते। असल नियम उतने जटिल नहीं हैं जितने लगते हैं – पर कुछ बारीकियाँ हैं जो जाननी ज़रूरी हैं। माला…