हाँ, बिना नहाए भी नाम जप किया जा सकता है। स्नान औपचारिक पूजा और माला-जप के लिए अनुशंसित है, पर भगवान के नाम के मानसिक स्मरण के लिए अनिवार्य नहीं। बीमारी, यात्रा, देखभाल या व्यस्त सुबह में मन ही मन नाम लेना सदा उचित है। असली शुद्धता मन की होती है, और नाम स्वयं पवित्र…