लिखित जप: कलियुग का सबसे सरल साधन
आज तक आपने नाम जपा है – पर कभी लिखा है? तुलसीदास के काल से चली आ रही एक परंपरा है जिसमें भक्त अपने जीवनकाल में लाखों, यहाँ तक कि करोड़ों बार “राम” लिखते हैं। इन नोटबुक्स को “राम नाम बही” कहते हैं, और वृंदावन में ऐसी हजारों बहियों का संग्रह आज भी सुरक्षित है।…