हर साल लाखों लोग नाम जप शुरू करना चाहते हैं – राम का, कृष्ण का, शिव का। लेकिन एक सवाल उन्हें रोक देता है: “क्या बिना गुरु-दीक्षा के जप कर सकते हैं? कहीं यह गलत तो नहीं होगा?” अगर आप भी इस दुविधा में हैं, तो उत्तर है – हाँ, नाम जप के लिए गुरु-दीक्षा…
सुबह के सात बज रहे हैं। नहाना बाकी है, रसोई का काम है, और मन है कि भगवान का नाम ले ले। पर एक शंका रोकती है: “क्या अशुद्ध हूँ, तो जप होगा क्या? भगवान बुरा तो नहीं मानेंगे?” यह शंका करोड़ों भक्तों के मन में रोज़ आती है। और कभी-कभी इसी शंका में जप…
बिस्तर पर लेटे-लेटे एक सवाल मन में आता है – “क्या मैं इस हालत में नाम जप कर सकता हूँ? क्या लेटकर जपना सही है? कहीं यह भगवान का अपमान तो नहीं?” जवाब है: हाँ, बिल्कुल सही है। और केवल “जायज़” ही नहीं – लेटकर मन में नाम जपना भक्ति के सबसे शक्तिशाली रूपों में…
आपकी थाली में प्याज-लहसुन है और मन में भगवान का नाम – क्या दोनों एक साथ नहीं हो सकते? यह सवाल उन करोड़ों भक्तों के मन में उठता है जो अपने रोज़ के खाने में प्याज-लहसुन का इस्तेमाल करते हैं लेकिन जप करना भी चाहते हैं। इसका जवाब उतना कठोर नहीं है जितना अक्सर बताया…
हाँ, खाना खाने के बाद भी नाम जप किया जा सकता है। जूठे मुँह की शुचिता का नियम माला और औपचारिक पूजा के लिए है, नाम के मानसिक स्मरण के लिए नहीं। भोजन के बाद कुल्ला या आचमन करके माला से जप करें; पर मन ही मन भगवान का नाम हर पल, हर स्थिति में…