जन्माष्टमी का जागरण – अधिकतर लोग मंदिर जाते हैं, दो घंटे भजन सुनते हैं, 12 बजे आरती देखते हैं और घर लौट आते हैं। यह भी एक पुण्य का काम है। लेकिन जो भक्त पूरी रात – संध्या से लेकर सूर्योदय तक – नाम जप में बिताना चाहते हैं, उनके लिए इस जागरण को घंटे-दर-घंटे…