कभी किसी मंदिर में या भजन-कीर्तन में “गोपाल गोपाल गोविंद गोपाल” की धुन सुनी है? यह धुन जितनी सरल लगती है, उतनी ही गहरी है। बस दो-तीन शब्द, बार-बार दोहराए जाते हैं – और देखते-देखते मन का शोर कम होने लगता है। यह कोई संयोग नहीं। “गोपाल” वह नाम है जिसमें कृष्ण की सारी सौम्यता,…