एक छोटी-सी गली, मटकी हाथ में, और पड़ोसी के घर माखन चुराकर ग्वाल-बालों में बाँटते हुए वह नटखट बालक – जिसके एक मुस्कान से यशोदा का सारा गुस्सा धुल जाए। यह कोई साधारण बच्चे की शरारत नहीं थी। यह ब्रह्माण्ड के स्वामी का वह खेल था जो प्रेम का सबसे गहरा दर्शन सिखाता है –…