गली के उस मोड़ पर भीड़ अचानक शांत हो जाती है। ढोल की थाप रुकती है। फिर नीचे से ऊपर की ओर उठते हाथ, एक के ऊपर एक चढ़ते कदम, और जब सबसे ऊपर वाला लड़का मटकी तक पहुंचता है – तो जो आवाज़ फटती है, वह सिर्फ जयकार नहीं होती। “गोविंदा आला रे!” वह…
एक छोटी-सी गली, मटकी हाथ में, और पड़ोसी के घर माखन चुराकर ग्वाल-बालों में बाँटते हुए वह नटखट बालक – जिसके एक मुस्कान से यशोदा का सारा गुस्सा धुल जाए। यह कोई साधारण बच्चे की शरारत नहीं थी। यह ब्रह्माण्ड के स्वामी का वह खेल था जो प्रेम का सबसे गहरा दर्शन सिखाता है –…