रात के ग्यारह बज रहे हैं। घर में बाकी सब सो चुके हैं। एक दीपक टिमटिमा रहा है। झूला सजा है, मूर्ति नहाई हुई है, और आप एक पल का इंतज़ार कर रहे हैं – रात 11 बजकर 57 मिनट का। यही है जन्माष्टमी का निशीथ काल। 45 मिनट का वह दरवाज़ा जब – परंपरा…
सावन सोमवार का व्रत रखने का निर्णय मन में आते ही अक्सर पहला सवाल यही होता है – “आज खाऊं क्या?” और फिर शुरू होती है असमंजस की एक लंबी सुबह। फोन पर search करो तो किसी ने एक सूची दी है, किसी ने दूसरी। माँ कह रही हैं एक बात, पड़ोसन कह रही हैं…
कभी आपने यह महसूस किया है – कथा सुन रहे हैं, लेकिन मन कहीं और भटक रहा है? कथा का एक शब्द कान में जाता है, दूसरा निकल जाता है। सावन सोमवार का व्रत है, थाली सजी है, माहौल बना है – पर भीतर से कोई गहराई महसूस नहीं होती। यह एक बहुत आम अनुभव…
अगस्त का पहला हफ़्ता था। पुणे में रहने वाली एक महिला का दिल्ली की बहन से फ़ोन पर झगड़ा हो गया – “तुमने सावन का व्रत शुरू क्यों नहीं किया? जुलाई के आखिर से ही सावन शुरू हो गया था!” पुणे वाली बहन हैरान – उसके पंडित जी ने तो 13 अगस्त से श्रावण बताया…
सावन का वन हरा था। आकाश घने बादलों से भरा था। और हिमालय की एक कन्या – हाड़-मांस की देह लेकर – उस ठंडी पथरीली धरती पर बैठी थी, आंखें बंद, ओठ हिलते हुए, बस एक ही नाम पर टिकी हुई – शिव। यह तपस्या वर्षों की नहीं, सहस्राब्दियों की थी। न भोजन, न जल,…
हर साल भाद्रपद की अमावस्या के आसपास 15 दिनों का वह पखवाड़ा आता है जब करोड़ों भारतीय उन आत्माओं को याद करते हैं जो इस दुनिया से जा चुकी हैं। श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान – ये सब बाहरी अनुष्ठान हैं। लेकिन इस पितृपक्ष में अपने पूर्वजों को देने वाली सबसे गहरी भेंट क्या है? वह है…
नवरात्रि का पाँचवाँ दिन है। सुबह से उपवास चल रहा है, माँ का जाप चल रहा है, घर में धूप की खुशबू और माहौल में एक अलग ही ऊर्जा है। और उसी दिन – या शायद तीसरे या सातवें दिन – पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। मन में एक घबराहट उठती है: “अब क्या? व्रत…
साल भर में चौबीस एकादशियाँ आती हैं – पर एक ऐसी है जिसमें अन्न तो दूर, एक बूँद पानी तक नहीं पिया जाता। और वह भी ज्येष्ठ की उस तपती गर्मी में, जब प्यास सबसे ज़्यादा सताती है। इसे कहते हैं निर्जला एकादशी – सबसे कठिन, और मान्यता के अनुसार सबसे फलदायी व्रत। सबसे रोचक…