काशी में शिव जिस “तारक मंत्र” से मोक्ष देते हैं
कल्पना कीजिए – काशी के एक प्राचीन घाट पर एक जीवन अपनी अंतिम साँसें ले रहा है। मान्यता कहती है कि उसी क्षण स्वयं महादेव, जो श्मशान और प्रलय के स्वामी हैं, झुककर उस मरते हुए प्राणी के कान में एक मंत्र फुसफुसाते हैं – और वही एक मंत्र उसे जन्म-मरण के अनंत चक्र से पार उतार देता है। हैरानी की बात यह है कि वह मंत्र कोई गूढ़ शिव-मंत्र नहीं है। वह है – राम नाम।
सोचिए इस दृश्य की गहराई – संहार के देवता, सबसे बड़े तपस्वी, स्वयं श्रीराम का नाम जपते हैं, और उसी नाम को मोक्ष का सबसे ऊँचा साधन बनाकर बाँट रहे हैं। इस एक मान्यता में नाम की पूरी महिमा छिपी है। इसी मंत्र को परंपरा “तारक मंत्र” कहती है। आइए समझें कि यह क्या है, और साधारण जीवन में हम इसका लाभ कैसे ले सकते हैं।
“तारक” का अर्थ – जो पार उतार दे
“तारक” शब्द संस्कृत धातु “तृ” से बना है, जिसका अर्थ है पार करना, उतार देना। तारक मंत्र वही कहलाता है जो जीव को इस संसार-सागर से पार उतार दे। यहाँ “सागर” का अर्थ है जन्म और मृत्यु का अंतहीन चक्र – बार-बार आना, बार-बार जाना। तारक मंत्र इस सागर के पार ले जाने वाली नाव है।
काशी (वाराणसी) को इसीलिए “मोक्षदायिनी” नगरी कहा जाता है। परंपरा के अनुसार जो प्राणी काशी की भूमि पर देह त्यागता है, उसे मुक्ति मिलती है – और इस मुक्ति का माध्यम है यही तारक मंत्र, जो स्वयं विश्वनाथ देते हैं। यह कोई शुष्क सिद्धांत नहीं, बल्कि सदियों से लाखों भक्तों के हृदय में बसी एक जीवंत मान्यता है, जिसके लिए लोग जीवन की संध्या काशी में बिताने आते हैं।
तुलसीदास का प्रमाण – शिव खुद जो मंत्र जपते हैं
यह केवल लोक-कथा नहीं है। गोस्वामी तुलसीदास रामचरितमानस के बालकांड में, “नाम वंदना” प्रसंग में, इसे स्पष्ट शब्दों में लिखते हैं:
महामंत्र जोइ जपत महेसू। कासीं मुकुति हेतु उपदेसू॥
अर्थ: जिस महामंत्र को महेश (शिव) स्वयं जपते हैं – वही काशी में मुक्ति के लिए उपदेश देते हैं। और वह महामंत्र है राम नाम। ध्यान दीजिए, तुलसीदास दो बातें एक साथ कह रहे हैं – पहली, शिव इस नाम को स्वयं जपते हैं; और दूसरी, वे इसी को मरते हुए जीव को उपदेश के रूप में देते हैं। जपने वाला और देने वाला एक ही है।
यहीं इस मंत्र का सबसे गहरा रहस्य है। महादेव अनंत काल से ध्यानमग्न रहने वाले सबसे बड़े योगी हैं – वे चाहते तो किसी भी जटिल साधना को चुन सकते थे। पर उन्होंने जिस नाम को अपने हृदय में बसाया, वह कोई कठिन विद्या नहीं, बल्कि वही सरल नाम है जो एक बच्चा भी ले सकता है। सबसे सरल नाम में सबसे ऊँची, मुक्ति देने वाली शक्ति है – यही बात शिव अपने जीवन से सिद्ध करते हैं।
संहार का देवता, करुणा का नाम – इस विरोधाभास का अर्थ
एक प्रश्न स्वाभाविक है – जो शिव प्रलय करते हैं, संहार करते हैं, वे एक “रक्षक” राम का नाम क्यों जपें? इसी विरोधाभास में सबसे सुंदर संदेश छिपा है। शिव जानते हैं कि अंत में जीव को जो चाहिए, वह न शक्ति है, न ऐश्वर्य – बल्कि उस पार उतार देने वाली करुणा है, जो राम नाम में बहती है।
भक्त परंपरा में कहा जाता है कि राम और शिव परस्पर एक-दूसरे के परम भक्त और आराध्य हैं – राम शिव की पूजा करते हैं (रामेश्वरम की स्थापना), और शिव राम का नाम जपते हैं। यह कोई प्रतिस्पर्धा नहीं, यह प्रेम का आदान-प्रदान है। और इस प्रेम के बीच जो नाम सेतु बनता है, वही तारक मंत्र है। जब सबसे बड़ा देवता किसी नाम के आगे झुक जाता है, तो उस नाम की महिमा का अनुमान लगाना कठिन नहीं।
यही कारण है कि तुलसीदास नाम को रूप से भी बड़ा बताते हैं – भगवान का दर्शन पाने के लिए विशेष पात्रता चाहिए, पर नाम जपने के लिए केवल जिह्वा और हृदय। (इस “नाम बनाम रूप” के गहन प्रसंग पर हमने अलग से विस्तार से लिखा है; यहाँ इतना समझना काफ़ी है कि नाम सबसे सुलभ होने के कारण ही सबसे अधिक तार सकता है।) इस पूरे विषय की विधि और महिमा जानने के लिए पढ़िए – राम नाम जप की विधि और महिमा।
यही तारक मंत्र आप रोज़ जप सकते हैं
सबसे सुंदर बात यह है कि यह मंत्र किसी अंतिम घड़ी के लिए सुरक्षित नहीं रखा गया। काशी में मरते समय जो नाम मोक्ष देता है, वही नाम आप आज, अभी, स्वस्थ अवस्था में जप सकते हैं। मृत्यु के समय वही नाम सहज रूप से जिह्वा पर आता है जिसे जीवनभर जपा गया हो – इसीलिए संत कहते हैं कि तारक मंत्र को अंत के लिए मत टालिए, उसे अभी से अपने श्वासों में बसा लीजिए।
राम नाम जप की सरल विधि:
- मंत्र: केवल “राम” भी पूर्ण तारक मंत्र है। “ॐ श्री राम जय राम जय जय राम” भी अत्यंत प्रचलित है। शुरुआत के लिए जो सहज लगे, वही चुनिए – नाम की शक्ति शब्द-संख्या में नहीं, स्मरण की निरंतरता में है।
- तरीका: स्वामी शिवानंद के अनुसार मानसिक जप (मन ही मन) सबसे शक्तिशाली होता है – उसमें मन सबसे गहरे उतरता है। आरंभ में हल्के स्वर में जपें, फिर धीरे-धीरे मन के भीतर ले जाएँ।
- माला: राम नाम के लिए तुलसी की माला परंपरागत रूप से सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है, रुद्राक्ष भी उपयुक्त है। सुमेरु मनका पार न करें – वहाँ पहुँचकर माला पलट दें।
- संख्या: एक माला यानी 108 जप से शुरू करें; शिवानंद 108 से 1080 (1 से 10 माला) प्रतिदिन का सुझाव देते हैं। थोड़ा पर रोज़ – यही सबसे टिकाऊ संकल्प है।
- समय: ब्रह्ममुहूर्त और संध्या-काल सबसे शुभ माने गए हैं। पर राम नाम के लिए कोई स्थान, कोई समय वर्जित नहीं – चलते-फिरते, काम करते हुए मन में जपते रहना भी उतना ही फलदायी है।
असली चुनौती जप करना नहीं, बल्कि उसे रोज़ बनाए रखना है। अगर गिनती रखना ही कठिन हिस्सा है, तो Devta App का राम नाम जप काउंटर यह काम संभाल लेता है – बस स्क्रीन पर टैप करते रहिए, ध्यान पूरी तरह नाम पर रहता है, और रोज़ का स्ट्रीक देखकर निरंतरता बनी रहती है। माला छूने या किसी विशेष शुद्धता की भी ज़रूरत नहीं – मन ही मन राम नाम कहीं भी, किसी भी अवस्था में जपा जा सकता है।
तारक मंत्र के बारे में 3 सामान्य भ्रम
- भ्रम 1 – “तारक मंत्र केवल मरते समय के लिए है”: यह आधा सच है। मान्यता काशी में अंत-समय की है, पर उसका असली संदेश है कि जिस नाम को जीवनभर जपा जाए, वही अंत में सहारा बनता है। तारक मंत्र जीने का साधन है, केवल मरने का नहीं।
- भ्रम 2 – “राम नाम केवल वैष्णवों का मंत्र है”: यह सबसे बड़ी भूल है। जब स्वयं शिव इस नाम को जपते और बाँटते हैं, तो यह नाम किसी एक संप्रदाय का कैसे रहा? तारक मंत्र शैव और वैष्णव – दोनों परंपराओं को जोड़ने वाला सेतु है।
- भ्रम 3 – “इसके लिए विशेष दीक्षा या काशी जाना अनिवार्य है”: “राम” एक खुला नाम है, किसी दीक्षा की आवश्यकता नहीं। और काशी तो स्थान की महिमा है; नाम तो आपके भीतर ही बसा है। जहाँ राम नाम है, वहीं काशी है – संतों का यही भाव रहा है।
जो नाम काशी में महादेव के होठों पर है, जो नाम मृत्यु को मुक्ति में बदल देता है – वही नाम इस क्षण आपकी जिह्वा पर भी है। तारक मंत्र को अंतिम घड़ी के लिए मत बचाइए; उसे आज से अपनी हर साँस का साथी बना लीजिए। राम।
तारक मंत्र क्या है?
तारक मंत्र वह मंत्र है जो जीव को संसार-सागर से पार उतार दे। काशी की मान्यता के अनुसार वह तारक मंत्र राम नाम है, जिसे शिव मृत्यु के समय जीव के कान में देते हैं।
क्या काशी में शिव सच में राम नाम देते हैं?
यह एक प्राचीन भक्ति मान्यता है। तुलसीदास रामचरितमानस में लिखते हैं – महामंत्र जोइ जपत महेसू, कासीं मुकुति हेतु उपदेसू – अर्थात जिस महामंत्र को शिव स्वयं जपते हैं, वही काशी में मोक्ष के लिए उपदेश देते हैं।
तारक मंत्र किस माला पर जपें?
राम नाम के लिए तुलसी की माला परंपरागत रूप से सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है, रुद्राक्ष भी उपयुक्त है। 108 मनकों की एक माला से शुरुआत करें। मानसिक जप के लिए माला अनिवार्य नहीं।
संबंधित लेख