जन्माष्टमी मंत्र - janmashtami-mantra-108-baar-kya-japen

जन्माष्टमी की रात 108 बार जपें ये मंत्र – निशीथ काल की साधना

रात के 11 बज रहे हैं। आप जागते हुए बैठे हैं – दीपक जल रहा है, घर में भजन की आवाज़ है, मन में हलचल है। जन्माष्टमी की यह रात साल में एक बार आती है। निशीथ काल में कृष्ण के जन्म की वह घड़ी बस कुछ मिनट दूर है।

और अब सवाल यह नहीं है कि रात कैसे जागें – सवाल यह है कि जब घड़ी 11:57 बजाए, तब आप क्या करें। किस मंत्र को उठाएं? कितनी बार? कैसे गिनें?

यह लेख ठीक उसी सवाल का जवाब है। जन्माष्टमी 2026 – शुक्रवार 4 सितंबर – की रात निशीथ काल 11:57 बजे से 12:43 बजे तक के 45 मिनट के लिए तीन मंत्र, एक विधि, और एक संकल्प।

पहले जन्माष्टमी 2026 की तिथि, मुहूर्त और निशीथ काल का विवरण देखें – फिर यहां वापस आकर मंत्र चुनें।

कौन सा मंत्र चुनें – तीन विकल्प

निशीथ काल में जप के लिए तीन मंत्र सबसे अधिक प्रचलित हैं। तीनों उचित हैं – लेकिन तीनों का स्वभाव अलग है। अपने मन की स्थिति देखकर एक चुनें:

1. हरे कृष्ण महामंत्र – सोलह नाम, एक सांस

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे

यह 32 अक्षरों में 16 नाम है। कलि-सन्तारण उपनिषद में इसे “कलियुग का सर्वश्रेष्ठ मंत्र” कहा गया है – और यह भी कहा गया है कि इसे जपने के लिए कोई नियम नहीं है, कोई शुद्धता की आवश्यकता नहीं है। रात के 12 बजे, जागरण की थकान में, उत्सव की हलचल में – हर अवस्था में यह मंत्र चलता है।

यह मंत्र उनके लिए है जो पहली बार मध्यरात्रि में बैठे हैं और कुछ “पकड़ने” जैसा चाहते हैं – एक लय, एक धुन, एक बहाव। एक बार बोलने पर एक मनका आगे करें।

2. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय – द्वादशाक्षरी मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

बारह अक्षरों का यह मंत्र विष्णु और कृष्ण दोनों का है। “वासुदेव के पुत्र” – श्रीकृष्ण – को समर्पित यह द्वादशाक्षरी मंत्र उनके लिए है जो नियमित जप करते हैं और इस मंत्र से पहले से परिचित हैं।

इसकी गति महामंत्र से धीमी है – हर जप थोड़ा और ठहरकर होता है। अगर आप ध्यान के स्वभाव वाले हैं और मानसिक जप (मन ही मन) करना चाहते हैं, तो यह मंत्र सबसे अनुकूल है। कृष्ण नाम जप काउंटर ऐप में इसे सीधे सेट करके गिनती रखी जा सकती है।

3. ॐ श्रीकृष्णाय नमः – सबसे सरल, सबसे सीधा

ॐ श्रीकृष्णाय नमः

जिन्होंने पहले कभी माला नहीं जपी, जो पहली बार निशीथ काल में बैठ रहे हैं, बच्चे जो परिवार के साथ जाग रहे हैं – उन सबके लिए यह मंत्र है। छोटा, स्पष्ट, और कृष्ण का सीधा नाम। 108 बार जपने में 10-12 मिनट लगते हैं। निशीथ काल के 45 मिनटों में कई बार किया जा सकता है।

तीनों में से एक चुनें। जो मन को स्वाभाविक लगे। जो जीभ पर बिना सोचे आए। वही आपका मंत्र है इस रात के लिए।

निशीथ काल में 108 जप कैसे करें

निशीथ काल शुरू होने से पहले – रात 11:45 तक – तैयार हो जाएं। बाद में व्यवस्था करने में समय जाता है और ध्यान भटकता है।

  • जगह: कृष्ण की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें। एक दीपक जला लें – घी का हो तो और अच्छा। फूल या तुलसी रख सकते हैं, न हो तो भी चलेगा।
  • संकल्प: बैठते ही एक पल आंखें बंद करें और मन में कहें – “कृष्ण, आज आपके जन्म की रात, 108 बार आपका नाम लेता/लेती हूं।” बस इतना संकल्प काफी है।
  • माला या ऐप: एक माला लें – या Devta App का जप काउंटर खोलें। माला से गिनती पुरानी परंपरा है; काउंटर से गिनती बिना ध्यान भटके होती है।
  • जप की गति: न बहुत तेज़ जिसमें शब्द टूटें, न इतना धीमा कि नींद आ जाए। एक सामान्य, लयबद्ध गति जिसमें हर शब्द सुनाई दे।
  • एक बार मंत्र = एक मनका/एक काउंट: हरे कृष्ण महामंत्र के लिए पूरी दो पंक्तियां = एक काउंट। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय = एक काउंट। ॐ श्रीकृष्णाय नमः = एक काउंट।
  • 108 पूरे होने पर: एक पल रुकें, आंखें बंद रखें। उस स्थिरता को महसूस करें। फिर चाहें तो दूसरा चक्र शुरू करें।

स्वामी शिवानंद (डिवाइन लाइफ सोसायटी) के अनुसार मानसिक जप – यानी मन में मंत्र को सुनते हुए जपना, होंठ हिलाए बिना – सबसे शक्तिशाली माना जाता है। निशीथ काल में जब घर में उत्सव का शोर हो, तब मानसिक जप एक अच्छा विकल्प है।

गिनती का संकट – जहां सबसे अधिक लोग चूकते हैं

जन्माष्टमी की रात जप का सबसे बड़ा दुश्मन ध्यान नहीं है – गिनती है।

रात के 12 बज रहे हैं। पास में परिवार बैठा है, कहीं शंख बजा, कहीं किसी ने कुछ कहा। आप मंत्र जपते जा रहे हैं – 47… या 57 थे? अब याद नहीं। तो क्या दोबारा शुरू करें? या यहीं से चलाएं?

यह असमंजस जप को बाधित करता है – और यह किसी एक की कमज़ोरी नहीं, यह उस क्षण की स्वाभाविक स्थिति है जब मन उत्सव में है और साथ-साथ साधना भी करनी है।

माला इसका पुराना हल है – लेकिन माला अंधेरे में उलझती है, सुमेरु का ध्यान रखना होता है, और अगर माला छूट गई या घर पर नहीं है तो? Devta App का जप काउंटर यहां इसीलिए काम आता है – हर बार स्क्रीन पर एक टैप, काउंट सुरक्षित। फोन लॉक हो जाए, रात में स्क्रीन बंद हो जाए – आपकी गिनती account में sync रहती है।

Devta App में जप काउंटर कैसे सेट करें – यह पूरी विधि इस लेख में है। निशीथ काल से पहले एक बार ऐप खोलकर काउंटर तैयार कर लें।

रातभर का संकल्प – 108 से शुरू करके

108 एक माला है – पूर्णता का प्रतीक। लेकिन यह अंत नहीं है, शुरुआत है।

निशीथ काल 45 मिनट का है। हरे कृष्ण महामंत्र को सामान्य गति से जपने पर 108 बार में लगभग 12-15 मिनट लगते हैं। यानी निशीथ काल में आप तीन पूरी मालाएं – 324 जप – कर सकते हैं। ॐ श्रीकृष्णाय नमः जैसे छोटे मंत्र में यह और भी अधिक हो सकते हैं।

एक सरल सीढ़ी:

  • 108 (1 माला): पहली बार या बच्चों के साथ जप करने वालों के लिए। यह पर्याप्त और पूर्ण है।
  • 216 (2 मालाएं): जो नियमित साधक हैं और निशीथ काल में थोड़ा और देना चाहते हैं।
  • 1008 जप: पूरी रात जागने का संकल्प जिनका हो, वे इस लक्ष्य को रख सकते हैं। निशीथ काल के बाद भी जपते रहें – सुबह जन्म-उत्सव के बाद 1008 पूरे करें।

108 नाम जपने के बाद कृष्ण के 108 नामों का संदर्भ लेना हो तो कृष्ण के 108 नाम अर्थ सहित यहां देखें – इसे पढ़कर जप में और गहराई आती है।

लेकिन ध्यान रखें: 108 पूरे हों या नहीं – मन में कृष्ण रहें, यह ज़रूरी है। संख्या साधन है, साध्य नहीं। जो 10 जप पूरे मन से करे, वह 1000 बिखरे जप से बेहतर है।

जन्माष्टमी की रात एक बात याद रहे: मंत्र आधी रात को नहीं बदलता। जो मंत्र आप 11:56 पर जप रहे थे, वही 12:00 पर भी उतना ही पूर्ण है। निशीथ काल एक अवसर है – एक पवित्र समय जिसमें ध्यान स्वाभाविक रूप से गहरा होता है। लेकिन जो बदलता है, वह मंत्र नहीं है – आप हैं। उस क्षण में आपका ठहरना, आपकी उपस्थिति, आपका भाव – यही है निशीथ काल की साधना।

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जन्माष्टमी की रात कौन सा मंत्र जपना चाहिए?

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे – यह 16-नाम महामंत्र जन्माष्टमी की रात के लिए सबसे उपयुक्त है। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय और ॐ श्रीकृष्णाय नमः भी जपे जाते हैं।

जन्माष्टमी पर 108 बार मंत्र जपना क्यों शुभ है?

108 की संख्या पारंपरिक रूप से एक माला का पर्याय है और पूर्णता का प्रतीक मानी जाती है। परंपरा में कहा जाता है कि निशीथ काल (मध्यरात्रि) में 108 बार जप करने से साधना का फल विशेष होता है।

निशीथ काल कितने बजे होता है?

जन्माष्टमी 2026 में निशीथ काल 11:57 बजे रात से 12:43 बजे रात तक है (4 सितंबर से 5 सितंबर की मध्यरात्रि)। यह 45 मिनट की साधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है – परंतु किसी भी रात जप करना सदैव उत्तम है।

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